एक दीप

19 अक्तूबर 2019   |  मीना शर्मा   (496 बार पढ़ा जा चुका है)

एक दीप

एक दीप, मन के मंदिर में,

कटुता द्वेष मिटाने को !

एक दीप, घर के मंदिर में

भक्ति सुधारस पाने को !


वृंदा सी शुचिता पाने को,

एक दीप, तुलसी चौरे पर !

भटके राही घर लाने को,

एक दीप, अंधियारे पथ पर !


दीपक एक, स्नेह का जागे

वंचित आत्माओं की खातिर !

जागे दीपक, सजग सत्य का

टूटी आस्थाओं की खातिर !


एक दीप, घर की देहरी पर,

खुशियों का स्वागत करने को !

एक दीप, मन की देहरी पर,

अंतर्बाह्य तिमिर हरने को !


दीप प्रेम का रहे प्रज्ज्वलित,

जाने कब प्रियतम आ जाएँ !

दो नैनों के दीप निरंतर

करें प्रतीक्षा, जलते जाएँ !

अगला लेख: दर्द का रिश्ता



रेणु
25 अक्तूबर 2019


दीप जले हैं घर - घर
तुलसी चौरे, मंदिर,
अंजुरि भर सुख का ये
खेला है !
बहुत प्यारी रचना प्रिय मीना बहन | सरस और सरल , साथ में लयबद्धता सोने पे सुहागा | आपको भी दीवाली की हार्दिक शुभकामनायें और बधाई

कुसुम कोठारी
25 अक्तूबर 2019

बहुत सुंदर और सकारात्मक लिए उत्कृष्ट सृजन।

आलोक सिन्हा
19 अक्तूबर 2019

वृंदा सी शुचिता पाने को , एक दीप तुलसी चौरे पर -- बहुत सुन्दर |

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