साँझ - बेला

22 अक्तूबर 2019   |  मीना शर्मा   (464 बार पढ़ा जा चुका है)


साँझ - बेला


विदा ले रहा दिनकर

पंछी सब लौटे घर,

तरूवर पर अब उनका

मेेला है !


दीप जले हैं घर - घर

तुलसी चौरे, मंदिर,

अंजुरि भर सुख का ये

खेला है !


रात की रानी खिली

कौन आया इस गली,

संध्या की कातर-सी

बेला है !


मिल रहे प्रकाश औ' तम

किंतु दूर क्योंकर हम,

भटकता है मन कहीं

अकेला है !


विरह - प्रणय का संगम

नयन हुए फिर से नम,

फिर वही बिछोह का दुःख

झेला है !


चिड़िया






साँझ - बेला

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रेणु
25 अक्तूबर 2019

बहुत प्यारी रचना प्रिय मीना बहन | सरस और सरल साथ में लयबद्धता सोने पे सुहागा | हार्दिक शुभकामनायें और बधाई | दीपावली आपने लिए शुभ और मंगलकारी हो |

आलोक सिन्हा
24 अक्तूबर 2019

अच्छी रचना है |

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09 अक्तूबर 2019
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