16 मात्रा पर कविता

26 अक्तूबर 2019   |  व्यंजना आनंद   (462 बार पढ़ा जा चुका है)

🕎 दीपावली 🕎

""""""""🌷"""""""


मन के तम को दूर हटाकर , (मात्रा--16)

ज्ञान का दीपक जलाना है।

चौतरफा फैला उजियारा ,

खुद को सत्पथ पर लाना है।।

💥

सबके मन में प्रीत जगाकर ,

विश्व बंधुत्व को पाना है।

मन की कलुषता मिटे सबकी,

ऐसा कुछ करके जाना है।

💥

हर घर पहुँचे प्रेम की डोर।

इस दीवाली जोर लगाएँ ।।

मन रावण सबका मर जाएँ ।

घर- द्वार में राम बस जाएँ ।।

💥

जैसे है दस मुँख रावण के,

वृत्तियाँ हममें सदा रहती।

सर्पो की भाँति फन उठाकर,

सदा हमें वो डँसती रहती ।।

💥

उन वृत्तियों का नाश ही तो,

सच्ची दीवाली कहलाती ।

मन में जब आते हैं भगवन,

बाती खुद से ही जल जाती ।।

💥

आओ इसी बार कुछ ऐसा करते है। (मात्रा- 22)

भारत को भारतीयता से भरते है।

सबके जीवन को रौशन कर के हम सब --

असहायों की सुंदर दुनिया रचते है।।


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व्यंजना आनंद (मिथ्या) ✍

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