कहो ना, कौनसे सुर में गाऊँ ?

29 अक्तूबर 2019   |  मीना शर्मा   (461 बार पढ़ा जा चुका है)

कहो ना, कौनसे सुर में गाऊँ ?

जिससे पहुँचे भाव हृदय तक,

मैं वह गीत कहाँ से लाऊँ ?


इस जग के ताने-बाने में

अपना नाता बुना ना जाए

ना जाने तुम कहाँ, कहाँ मैं

मार्ग अचीन्हा, चुना ना जाए !

बिन संबोधन, बिन बंधन

मैं स्नेहपाश बँध जाऊँ !

कहो ना, कौनसे सुर में गाऊँ ?


नियति-नटी के अभिनय से

क्योंकर हम-तुम विस्मित हों,

कुछ पल तो संग चले,

बस यही सोच-सोच हर्षित हों !

कोई भी अनुबंध ना हो, पर

पल-पल कौल निभाऊँ !

कहो ना, कौन से सुर में गाऊँ ?


जाने 'उसने' कब, किसको,

क्यों, किससे, यहाँ मिलाया !

दुनिया जिसको प्रेम कहे,

वो नहीं मेरा सरमाया !

जाते-जाते अपनेपन की,

सौगातें दे जाऊँ !

कहो ना, कौनसे सुर में गाऊँ ?


जिससे पहुँचे भाव हृदय तक,

मैं वह गीत कहाँ से लाऊँ ?


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आलोक सिन्हा
01 नवम्बर 2019

अच्छी रचना है |

शिल्पा रोंघे
29 अक्तूबर 2019

सुंदर रचना

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