साथ

09 नवम्बर 2019   |  जय कुमार   (440 बार पढ़ा जा चुका है)

एक पहाड़ हो, लगे साथ समंदर , समंदर का किनारा हो , और तुम्हारा साथ हो, ढलती हुई सूरज की किरनें हो, तुम्हारा हाथ मेरे हाथ हो, लगे साथ दोनों के कदम I ...

एक पहाड़ हो, लगे साथ समंदर , समंदर का किनारा हो , और तुम्हारा साथ हो, ढलती हुई सूरज की किरनें हो, तुम्हारा हाथ मेरे हाथ हो, लगे साथ दोनों के कदम I ...

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