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22 नवम्बर 2019
घनात्मक भाव मन में प्रविष्ट कर संचित हो पायेंऋणभाव निकस कर गंगा धार संग बह जायेंजागतिक् एषणाएं पोषित कर नहीं ललचायेंसहज जीवन यापन कर सद् गति पायेंअनंत भुभुक्षा त्याग हरिपद में रम जायेंडॉ. कवि कुमार निर्मल
22 नवम्बर 2019
20 नवम्बर 2019
भ्रुण और नवजात शिशु कोहँसना किसने सिखलाया।चोट, पीड़ा नहीं पर स्वत:रोना उसको सिखलाया।।हाथ पकड़ कर पशु कोकिसी ने नहीं चलना सिखलाया।अन्न नहीं था जब धरा पर,वनस्पतियों से काम चलाया।।पापाचार गह, सदाचार सेमुँह मोड़ हे मानव अधोगति पाया!हृदयांचल में बैठा प्रभु,उनकी सुन नहीं पाया!!डॉ. कवि कुमार निर्मल
20 नवम्बर 2019
18 नवम्बर 2019
झोपड़ी हो या फिर महल चौबारा,अपना घर प्यारा लगता है।तीर्थ करो या जाओ माया नगरी,अपने घर में हीं सुख मिलता है।।डॉ. कवि कूमार निर्मल
18 नवम्बर 2019
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