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24 नवम्बर 2019
अपनी आभा बिखेरते चलो तो मानूंअँधेरा मिटा खुशबुएँ फैला दो तो जानूंगुरुर किस हुनर का तुम हो पाले,मोहब्बत का फर्ज़ संभालोतो खुदा मानूंडॉ. कवि कुमार निर्मल
24 नवम्बर 2019
19 नवम्बर 2019
दौलतजो दिया है गैरों को वोही काम आ साथ जाएगा।राजा का बेटा ताज पहन याद नहीं कर पायेगा।।डॉ. कवि कुमार निर्मल
19 नवम्बर 2019
12 नवम्बर 2019
चराग़ जलता रहा रात भर।मदहोश परवाना न मंडराया मगर।।बाति उजाला देख बुझने को थी।बातें बहुत मगर ख़्वाबों की थी।।तेल में दम था बहुत मगर।एक फूंक से अँधेरे में डुबा शहर।।डॉ. कवि कुमार निर्मल
12 नवम्बर 2019
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