एक सपना

15 नवम्बर 2019   |  दीपिका सिकदार   (3968 बार पढ़ा जा चुका है)

जिंदगी तू बता दे, ये सपने तो है पर रास्ता कहा

जब गले मौत के लगने ही है , तो दर्द से मुलाकात न करा

जख्म तो बहुत है पर , मरहम लागू कौन सा

ये लहू की लाली को भी मिट जाना,

फिर क्यों सुरमे से है, सजना सवारना

इस मुकद्दर ने भी क्या दिया ,

जवानी दिया तो बचपन छीन लिया


शि कवा तो नही जिंदगी से ,

शिकायत भी नहीं मौत से

बस रहम करना मरे खुदा,

जिस दिन जिंदगी रूठ जाये मुझसे

मै मौत के गले लगु खुशी से


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