मयपन

21 नवम्बर 2019   |  डॉ कवि कुमार निर्मल   (3074 बार पढ़ा जा चुका है)

मयपन

यह मयपन तुझको रे ले डूबेगा

दर्प का बोझ क्या तूं सह लेगा

अपने तक सिमित रख अपना मन,

निज सुख खातिर हीं सदा बोलेगा

सम्राट बन के भी कटोरा लिए डोलेगा

परहित कर, बैताल बन क्या कर लेगा


डॉ. कवि कुमार निर्मल

अगला लेख: अध्यात्मवाद्



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
12 नवम्बर 2019
सांप सीढ़ी सिर्फखेल नहीं,जीवन दर्शन भी है.सफलता और विफलता दुश्मन नहीं, एक दूसरे की साथी है.हर रास्ते पर सांप सा रोड़ा, कभी मंजिल के बेहद करीब आकर भी लौटना पड़ता है.कभी सिफ़र से शिखर तो कभी शिखर से सिफ़र का सफ़र तय करना पड़ता है.सफलता का कोई
12 नवम्बर 2019
13 नवम्बर 2019
<!--[if gte mso 9]><xml> <o:OfficeDocumentSettings> <o:RelyOnVML/> <o:AllowPNG/> </o:OfficeDocumentSettings></xml><![endif]--><!--[if gte mso 9]><xml> <w:WordDocument> <w:View>Normal</w:View> <w:Zoom>0</w:Zoom> <w:TrackMoves/> <w:TrackFormatting/> <w:PunctuationKer
13 नवम्बर 2019
19 नवम्बर 2019
हुई सभा एक दिन गुड्डे गुड़ियों की.गुड़िया बोली,मैं सुंदरता की पुड़ियामुझसे ना कोई बढ़िया.इतने में आया गुड्डापहन के लाल चोला,कितनों का घमंड है मैंने तोड़ा.बीच में उचका काठी का घोड़ाअरे चुप हो जाओ तुम थोड़ा.मैंने ही हवा का रुख़ है मोड़ा.लट्टू घूमा, कुछ झूमा.बोला लड़ों
19 नवम्बर 2019
12 नवम्बर 2019
चराग़ जलता रहा रात भर।मदहोश परवाना न मंडराया मगर।।बाति उजाला देख बुझने को थी।बातें बहुत मगर ख़्वाबों की थी।।तेल में दम था बहुत मगर।एक फूंक से अँधेरे में डुबा शहर।।डॉ. कवि कुमार निर्मल
12 नवम्बर 2019
12 नवम्बर 2019
चराग़ जलता रहा रात भर।मदहोश परवाना न मंडराया मगर।।बाति उजाला देख बुझने को थी।बातें बहुत मगर ख़्वाबों की थी।।तेल में दम था बहुत मगर।एक फूंक से अँधेरे में डुबा शहर।।डॉ. कवि कुमार निर्मल
12 नवम्बर 2019
13 नवम्बर 2019
मोहब्बत
13 नवम्बर 2019
12 नवम्बर 2019
गी
मन की बंजर भूमि पर,कुछ बाग लगाए हैं !मैंने दर्द को बोकर,अपने गीत उगाए हैं !!!रिश्ते-नातों का विष पीकर,नीलकंठ से शब्द हुए !स्वार्थ-लोभ इतना चीखे किस्नेह-प्रेम निःशब्द हुए !आँधी से लड़कर प्राणों के,दीप जलाए हैं !!!मैंने दर्द को बोकर अपने....अपनेपन की कीमत देनी,होती है अब अपनों को !नैनों में आने को, रिश
12 नवम्बर 2019
14 नवम्बर 2019
मानव समाज एक और अविभाज्य हैजाति-पाति रंग-भेज शोषण का अलाप हैदासिता-प्रतारण-दूहन का ताण्डव व्याप्त हैदग्ध मानव आक्रांत अब सुद्र विप्लव तैयार हैमानव समाज एक और अविभाज्य हैजाति-पाति रंग-भेज शोषण का अलाप हैडॉ. कवि कुमार निर्मल
14 नवम्बर 2019
24 नवम्बर 2019
अपनी आभा बिखेरते चलो तो मानूंअँधेरा मिटा खुशबुएँ फैला दो तो जानूंगुरुर किस हुनर का तुम हो पाले,मोहब्बत का फर्ज़ संभालोतो खुदा मानूंडॉ. कवि कुमार निर्मल
24 नवम्बर 2019
19 नवम्बर 2019
दौलतजो दिया है गैरों को वोही काम आ साथ जाएगा।राजा का बेटा ताज पहन याद नहीं कर पायेगा।।डॉ. कवि कुमार निर्मल
19 नवम्बर 2019
19 नवम्बर 2019
नशा "नाश" का दूसरा नाम है.ये नाश करता है बुद्धि का.ये नाश करता है धन का.ये नाश करता है संबंधों का.ये नाश करता है नैतिक मूल्यों का.नाश नहीं निर्माण की तरफ बढ़ोयुवाओं तुम नशामुक्त समाज बनानेका संकल्प लो.शिल्पा रोंघे
19 नवम्बर 2019
10 नवम्बर 2019
https://hindi.pratilipi.comशब्बे-ए-बाराततेरी इबादत मेंहर लम्हा गुजर जाएरहमत तेरीइस बंदे पर नज़र आएगुस्ताख़ियां है कबूल,सजा मुकर्रर कर दोऔलाद हूँ तेरी,इल्तिज़ा पूरी कर दोडॉ. कवि कुमार निर्मल
10 नवम्बर 2019
06 नवम्बर 2019
''कवायत आज की"जख़्म से दिल जार - जार हुआअपने भी पराये समझ रहे,मन में फ़कीरी का ख़्याल हुआदुनिया का अज़ुबा इंतिहा हुआ★★★★★★★★★★★★ख़्वाब का क्या (?) है भरोसा-कब (?) टूट कर बिखर जाएँयादों का गुबार तक गुम होअलविदा कह जाएतन नहीं दिल बनदिल में समा जाओतूंफा झेल कर किया कबूल,गहरी ख़ंदक नफ़रत की न बनाओ★★★★★★★★★★★★★
06 नवम्बर 2019
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x