सुधार की कैसी चाह ?

27 नवम्बर 2019   |  शिल्पा रोंघे   (3502 बार पढ़ा जा चुका है)

है जुटे हुए कुछ लोग
सुधार में.


है जुटे कुछ लोग आधुनिकता
की दुहाई देकर पंरपराओं को
प्राचीन बताने में.

तो कुछ पंरपराओं की आड़ लेकर
बदलाव को ठुकराने में.

है जुटे हुए कुछ लोग
अपनी ही बात सही मनवाने में.

उनकी इच्छाओं का नहीं कोई
अंत, सिर्फ इसलिए जुटे है वो दूसरों का
हक छीनने में जिसके वो अधिकारी हैं.

सच से लगता है उन्हें डर इसलिए झूठ
का चमकता चोला वो पहने हुए.
तो कभी सफेदपोश के रूप में.

हां जुटे है कुछ लोग अपने ही झूठ
को सच बताने में, और सच को दबाने
में.

शिल्पा रोंघे

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शिल्पा रोंघे
29 नवम्बर 2019

thanks

तक्षक राजपूत
29 नवम्बर 2019

अदभुद |

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