स्वतंत्रता

19 दिसम्बर 2019   |  डॉ कवि कुमार निर्मल   (6261 बार पढ़ा जा चुका है)

बंद पिंजड़े से निकल जब पँक्षि

आजाद हो गगन पार जाता है।

मन की समस्त 'कुण्ठाओं' को

पिंजड़े में छोड़ वह आह्लादित

हो गुनगुनाते उड़ता जाता है।।

बँधनों से मुक्त हो- घुटन से निकस वह

मुक्त प्राणी बन अराध्य तक जाता है।।।

डॉ. कवि कुमार निर्मल

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