साथी

21 दिसम्बर 2019   |  शिल्पा रोंघे   (403 बार पढ़ा जा चुका है)

साथी उसे बनाओं जो सुख दुख में साथ दे.

ना कि उसे जो सिर्फ तस्वीरों में आपकी शोभा बढ़ाएं.


शिल्पा रोंघे

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13 दिसम्बर 2019
अभीशब्दनगरी पर एक बड़ा अच्छा और मार्मिक शब्दचित्र पढने का सौभाग्य प्राप्त हुआ... डॉदिनेश शर्मा का लिखा “महानगर का तपस्वी”... आप लोग भी पढ़ें... महानगरका तपस्वी - दिनेश डॉक्टर प्रोपर्टियों के रेट गिरने के बाद से वर्मा का हौसलाकाफी हिला हुआ था और कल शाम जब मैंने उसे कहा
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14 दिसम्बर 2019
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24 दिसम्बर 2019
“चकाचौंध” पत्रिका अपने प्रकाशन के चार साल पूरेकर चुकी थी, किसी को उम्मीद भी नहीं थी कि इस पत्रिका की बिक्री इतनी बढ़ जाएगी,अब ऐसे में सभी सदस्यों को मीटिंग में बुलाया गया और उनके योगदान के लिए बधाई दीगई। तभी मीटिंग में एक व्यक्ति ने पत्रिका
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28 दिसम्बर 2019
झड़ने दो पुराने पत्तों को.🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂गिरने दो फूलों को जमीं पर.🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼कि नए पत्ते फिर आएंगे शाखों पर.🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿कि नए फूल फिर उगेंगे डाली पर.🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹ताकेंगे आसमान की ओर.🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴गिरने से मत डरो, झड़ने से ना डरो.बीज भी जमीन में गिरकर ही पौधे
28 दिसम्बर 2019
30 दिसम्बर 2019
नू
वहीं खड़े है वृक्ष सभी तनकर.वहीं खिल रहे है फूल सुंगध फैलाकर.सदियों से वहीं खड़े पर्वत विशाल.उसी समुद्र में जाकर मिल रही तरंगिणी.उसी डाल पर बैठा है पक्षी घरौंदा बनाके,उसी नभ में उड़ रहा है पंख फैलाकर.कुछ नहीं बदलता नवीन वर्ष के साथ हां बस संकल्प निश्चित ही हो जाते है दृढ़.बीते वर्ष में मिली सीखें मा
30 दिसम्बर 2019
19 दिसम्बर 2019
कहते है जो ये कि वक्त के पंजों से बचालेंगे तुम्हेंवहीं सबसे बड़ेशिकारी होते हैं.शिल्पा रोंघे
19 दिसम्बर 2019
31 दिसम्बर 2019
सा
चंद्र की शुभ्र किरणेंले रही विदा दुल्हन की तरह.रात्री की डोली मेंबैठकर उन्हें सूर्योदय के घर जाना है.तम तो प्रकाशतक जाने का प्रतिदिन का साधन है.किंतु आज पिछले बरस कोसबको नवीनवर्ष से मिलवानाहै.शिल्पा रोंघे
31 दिसम्बर 2019
17 दिसम्बर 2019
हर बार सच्चाई की सफाई देना जरुरी नहीं.कभी कभी सही वक्त सब कुछसाफ कर देता हैअपने आप ही.सूरज को ढकनेकी कोशिश करता हैबादल हर कभी, लेकिन उसे रोशनी देनेसे रोक सका हैक्या वो कभी.शिल्पा रोंघे
17 दिसम्बर 2019
18 दिसम्बर 2019
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13 दिसम्बर 2019
जो
आसान नहीं है ज़िंदगीजीने का तरीका सीखलाना.आसान नहीं किसी कोसही राह दिखाना.आसान नहीं है खुद को भी बदलना, कुछ ख़्वाहिशोंको छोड़ना, कुछ सुविधाओं को त्यागना.त्याग की अग्नी में तपना औरउम्मीद के दीपक जलाना.धूप, बारिश, और ठंडको सहना.होंठो पर शिकायत कम और समाधाननिकालना.हां सचम
13 दिसम्बर 2019
07 दिसम्बर 2019
हां दर्द सहना भी एक कला है। गम बर्दाश्त कर लेना भी एक कला है। खुद नाखुशी के दौर में रहकरदूसरों से ना जलना भी एक कला है। छिपकर रोना भी एक कला है । अंधेरे में भी जुगनू बनकर जीनाएक कला है। कहती है अगर खुदगर्ज़ दुनिया तोकहने तो कहने दो। क
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