तुम भी बदल गए

04 जनवरी 2020   |  शिशिर मधुकर   (417 बार पढ़ा जा चुका है)

तुम भी बदल गए

कैसे दर्द ना हो मुझे तुम भी बदल गए

अरमान मेरे कदमों तले सारे कुचल गए


यूं तो है भीड़ हर तरफ तुझ सी ना बात है

देखा है तुझको जिस घड़ी आशिक मचल गए


अब वो कभी ना आएगा मुझसे है कह रहा

बिजली गिराओ ना सुनो दिलबर दहल गए


अच्छी नहीं ये बात सनम सब कुछ भुला दिया

उनकी भी कुछ तो सोच जो करते पहल गए


भूलो ना प्यार से तेरे ज़िंदा हूं आज तक

मधुकर तेरी मुस्कान से दिल जो बहल गए



अगला लेख: ना कोई अपना हुआ



आलोक सिन्हा
04 जनवरी 2020

यह भी अच्छी गजल है। नव वर्ष की शुभ कामनायों के साथ बहुत बहुत प्रणाम सपरिवार सदैव स्वस्थ सानन्द रहें।

शिशिर मधुकर
06 जनवरी 2020

तहे दिल से शुक्रिया आलोक जी. आपको भी नववर्ष 2020 की अनेकों शुभकामनाएं . आपका स्नेह यूँही मिलता रहेगा ऐसी तमन्ना है .

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