आजादी

04 जनवरी 2020   |  डॉ कवि कुमार निर्मल   (400 बार पढ़ा जा चुका है)

आजादी

💐💐💐💐💐💐💐💐💐


चित्तौड़ का राणा प्रताप कहाँ है?


झाँसी की लक्ष्मी बाई कहाँ है??


क्षत्रपति शिवाजी की तलवार कहाँ है?


असली आजादी का जुनून गया कहाँ है??



शहिद दिवस पर श्रद्धांजलि मिल कर देते रहना!


'राजनीतिक आजादी' को झंडा फहराते रहना!!


"सहोदर भाई" की प्रीत नहीं जब जानी!


भूखे-नंगे की नम आँखें भी न पहचानी!!



सुपुर्द किया देश को पृथकतावादियों के हाँथों!


नगाड़ों के बीच पंपलेट उनका बस सब बाँटो!!


"आर्थिक आज़ादी" की खातिर कुछ करना है भाई!


गुजर चुँके हैं दो-दो देश की छाती पर से रे कसाई!!


दहन झेल कर भी आँखें बंद है, बचाओ मेरे साईं!!!


😢😢😢😢😢😢😢😢😢😢😢😢😢😢


डॉ. कवि कुमार निर्मल

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