उलझनों में

06 जनवरी 2020   |  शिशिर मधुकर   (414 बार पढ़ा जा चुका है)

उलझनों  में

त्तुम्हारे पास जीने के सुनो कितने सहारे हैं

मैंने तो उलझनों में बिन तेरे लम्हें गुजारे हैं


कोई भी दर नहीं ऐसा जहां पे चैन जा मांगू

तेरे आगे तब ही तो हाथ ये दोनों पसारे हैं


दर्द सहता रहा हूं मैं दवा मिलती नहीं कोई

छुपे शायद इसी में जिंदगी के कुछ इशारे हैं


भले ही तुम जमाने के लिए सच से मुकर जाओ

मेरी धड़कन के सारे बोल पर केवल तुम्हारे हैं


खुदा कितनों को मिलता है सुनो दुनिया सयानी में

नाम महबूब के नाधुकर तब ही आशिक पुकारे हैं


अगला लेख: ना कोई अपना हुआ



आलोक सिन्हा
06 जनवरी 2020

बहुत सुन्दर |

शिशिर मधुकर
07 जनवरी 2020

बहुत बहुत धन्यवाद आलोक जी ....

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
10 जनवरी 2020
10 जनवरी 2020
25 दिसम्बर 2019
★★मसीहा फिर आओ★★येसु! बार - बार आ कर आलोक फैलाओअँधेरा छाया- फिर से ज्योत बिखराओतुमने सदा प्यार बाँट शुभ संदेश दिया हैहमने बँट कर नफ़रतभरा अंजाम दिया हैचमत्कार फिर दिखला कर होश में लाओप्रायश्चित और प्रार्थना का मार्ग बताओयेसु! बार - बार आ कर आलोक फैलाओअँधेरा छाया- फिर से ज्योत बिखराओडॉ. कवि कुमार निर
25 दिसम्बर 2019
02 जनवरी 2020
तक़दीर में केवल खुशियां कब आती हैं सच्चे प्यार में परेशानियां सब आती हैं छुपा ना रहे जब राज़ कोई दरमियांमोहब्बत में गहराइयां तब आती हैं सोचा भूल गया तुझसे बिछड़के लेकिन तेरे संग गुजारी शामें याद अब आती हैं फैल जाती है खुशबू सारी फ़िज़ाओं में तेरे तन को छूकर हवायें जब आती हैं ...................
02 जनवरी 2020
11 जनवरी 2020
अग्नि मे तपकर, सोने की पहिचान होती है।नन्नी सी जान, देश की शान होती है।यही ज्योति सबके घर की उजाला होती है।नन्नी सी गुड़िया दिल की तारा होती है।।यही सम्मान यही दिल की जान होती है।नन्नी सी जान देश की शान होती है।।1।।ये ना समझ नादान, इनक
11 जनवरी 2020
06 जनवरी 2020
06 जनवरी 2020
04 जनवरी 2020
कैसे दर्द ना हो मुझे तुम भी बदल गए अरमान मेरे कदमों तले सारे कुचल गए यूं तो है भीड़ हर तरफ तुझ सी ना बात है देखा है तुझको जिस घड़ी आशिक मचल गए अब वो कभी ना आएगा मुझसे है कह रहा बिजली गिराओ ना सुनो दिलबर दहल गए अच्छी नहीं ये बात सनम सब कुछ भुला दिया उनकी भी कुछ तो सोच जो करते पहल गए भूलो ना प्यार से
04 जनवरी 2020
14 जनवरी 2020
हा
हाय पैसे तूने क्या किया ? हाय पैसे तूने क्या किया,मनुष्य को मनुष्य न रहने दिया,सारे बंधन और रिश्ते तूने,यों ही तोड़ा,मर्यादा तूने क्यों तोड़ा,हाय पैसा तूने क्या किया।मानव जन को तूने,कौन-सी खायी में ढकेला,सारी संवेदना की पड़ताल कर,मनुष्य
14 जनवरी 2020
02 जनवरी 2020
तन्हाई किसी की मुस्तकबिल न होखुशियां इतनी भी मुश्किल न होऔर पाने की आशा होअंतिम लक्ष्य हासिल न होप्यार तो सच्चा होलेकिन उसकी मंजिल न होप्रेम में डूबा होस्नेह-सरिता का साहिल न होमन में समर्पण होमहबूबा संगदिल न होज्ञान का भंडार होपर मानव जाहिल न होउससे भी प्यार होजो उसके काबिल न हो .................
02 जनवरी 2020
26 दिसम्बर 2019
येसु फिर आओ ★★मसीहा फिर आओ★★येसु! बार - बार आ कर आलोक फैलाओअँधेरा छाया- फिर से ज्योत बिखराओतुमने सदा प्यार बाँट शुभ संदेश दिया हैहमने बँट कर नफ़रतभरा अंजाम दिया हैचमत्कार फिर दिखला कर होश में लाओप्रायश्चित और प्रार्थना का मार्ग बताओयेसु! बार - बार आ कर आलोक फैलाओअँधेरा छाया- फिर से ज्योत बिखराओडॉ.
26 दिसम्बर 2019
19 जनवरी 2020
अमीरों के भगवान,महलों में पूूूूजे जाते है!भिक्षा-पात्र वाले साईं भक्त,झोपड़-पट्टी में धुनी रमाते हैं!!डॉ. कवि कुमार निर्मल
19 जनवरी 2020
01 जनवरी 2020
किसी की मोहब्बत में खुद को मिटाकर कभी हम भी देखेंगे अपना आशियां अपने हाथों से जलाकर कभी हम भी देखेंगे ना रांझा ना मजनूं ना महिवाल बनेंगे इश्क में किसी के महबूब बिन होती है ज़िंदगी कैसी कभी हम भी देखेंगे मधुशाला में करेंगे इबादत ज़ाम पियेंगे मस्ज़िद में क्या सच में हो जायेगा ख़ुदा नाराज़ कभी हम भी देखेंगे
01 जनवरी 2020
02 जनवरी 2020
हर दिन होली और हर रात दिवाली है जब बिहारी की महबूबा होती नेपाली है ग़र यकीं ना आये तो इश्क़ करके देखो फिर समझ जाओगे क्या होती कंगाली है जिसकी खातिर लड़ता रहा वो ज़माने से आज उसी ने कह दिया उसे तू मवाली है जरूर इज्ज़त करता होगा वो उसकी जो ज़ली
02 जनवरी 2020
सम्बंधित
लोकप्रिय
14 जनवरी 2020
02 जनवरी 2020
02 जनवरी 2020
28 दिसम्बर 2019
02 जनवरी 2020
18 जनवरी 2020
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x