Hindi poetry on love and expectations - ख़त ; अर्चना की रचना

07 जनवरी 2020   |  अर्चना वर्मा   (4928 बार पढ़ा जा चुका है)

Hindi poetry on love and expectations - ख़त ; अर्चना की रचना

प्रेम पर आधारित कविता हिंदी में

ख़त

मैंने उन्हें एक ख़त भिजवाया है

एक लिफाफे में उसे रखवाया है

देखने में कोरा न लगे,इसलिए

उस लिफाफे को खूब सजाया है

जो पहुचेगा वो उनके हाथों में

रख देंगें वो उसे किताबें में

सोचेंगे की क्या पढूं ,

जब ख़त के अन्दर का हाल

लिफाफे की सजावट में उभर आया है

मैंने उन्हें एक ख़त भिजवाया है

एक लिफाफे में उसे रखवाया है

सोचती हूँ कोरा इसे जो छोड़ देती

तो क्या उनके मन को कचोट पाती

चमकते लिबास ने ढांक रखा है

उदास रूह का हाल

और इस चेहरे को हंसी से सजाया है

मैंने उन्हें एक ख़त भिजवाया है

एक लिफाफे में उसे रखवाया है

ख़त के भीतर कुछ खास नहीं

तुम कैसे हो ,कोई परेशानी की बात तो नहीं ?

अपने बारे में क्या लिखती

मेरा हाल वो इस लिफाफे से जान ही लेंगे

हूँ उनके ख़त के इंतजार में , क्या ये वो मान लेंगे

क्योंकि उनके पिछले ख़त का जवाब भी

अब तक न पहुँच पाया है

मैंने उन्हें एक ख़त भिजवाया है

एक लिफाफे में उसे रखवाया है

मैंने उन्हें एक ख़त भिजवाया है

एक लिफाफे में उसे रखवाया है

देखने में कोरा न लगे,इसलिए

उस लिफाफे को खूब सजाया है…

अर्चना की रचना “सिर्फ लफ्ज़ नहीं एहसास”

Hindi poetry on love and expectations - ख़त > अर्चना की रचना

https://archanakirachna.com/khat-a-hindi-poetry-based-on-love-and-expectations/

अगला लेख: Hindi Inspirational Poetry on New Year - नया साल ; अर्चना की रचना



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
06 जनवरी 2020
देखो फिर एक नया साल जुड़ गयाहर बात वही घात वहीफिर से उसे ठीक करने कानया ज़ज्बा जुड़ गयादेखो फिर एक नया साल जुड़ गयाबहुत कुछ देखा और सीखा बीते साल मेंबहुत कुछ मिला भी मुफलिसी के हाल मेंउस ऊपर वाले के करम से मैंमैं हर वार सह गयादेखो फिर एक नया साल जुड़ गयाकुछ मेरे अपने थे जो दूर
06 जनवरी 2020
24 दिसम्बर 2019
सर्दी की धूप प्रेम पर आधारित हिंदी कविताइश्क तेरा सर्दी की गुनगुनी धूप जैसा जो बमुश्किल निकलती है पर जब जब मुझ पर पड़ती है मुझे थोडा और तेरा कर देती है मैं बाहें पसारे इसकी गर्माहट को खुद में समा लेती हूँ इसकी रंगत न दिख जाये चेहरे में कही इसलिए खुद को तेरे सीने में छुपा
24 दिसम्बर 2019
06 जनवरी 2020
देखो फिर एक नया साल जुड़ गयाहर बात वही घात वहीफिर से उसे ठीक करने कानया ज़ज्बा जुड़ गयादेखो फिर एक नया साल जुड़ गयाबहुत कुछ देखा और सीखा बीते साल मेंबहुत कुछ मिला भी मुफलिसी के हाल मेंउस ऊपर वाले के करम से मैंमैं हर वार सह गयादेखो फिर एक नया साल जुड़ गयाकुछ मेरे अपने थे जो दूर
06 जनवरी 2020
24 दिसम्बर 2019
सर्दी की धूप प्रेम पर आधारित हिंदी कविताइश्क तेरा सर्दी की गुनगुनी धूप जैसा जो बमुश्किल निकलती है पर जब जब मुझ पर पड़ती है मुझे थोडा और तेरा कर देती है मैं बाहें पसारे इसकी गर्माहट को खुद में समा लेती हूँ इसकी रंगत न दिख जाये चेहरे में कही इसलिए खुद को तेरे सीने में छुपा
24 दिसम्बर 2019
08 जनवरी 2020
प्रेम और याद पर आधारित हिंदी कविता बारिशबारिश से कहो यूं न आया करे मुझे तेरा उनके बगैर आना अच्छा नहीं लगतातूने आने से पहले दस्तक तो दी थीसर्द मौसम में भिगोने की जुर्रत तो की थी जितना चाहे रिझा ले मुझको रूमानी हो केमुझे उनके बिना भीगना अच्छा
08 जनवरी 2020
14 जनवरी 2020
चलो थोडा दिल हल्का करें कुछ गलतियां माफ़ कर आगे बढें बरसों लग गए यहाँ तक आने में इस रिश्ते को यूं ही न ज़ाया करें कुछ तुम भुला दो , कुछ हम भुला देंकड़ी धूप में रखा बर्तन ही मज़बूत बन पाता है उसके बिगड़ जाने का मिटटी को क्यों दोष दें कुछ तुम भुला दो , कुछ हम भुला देंयूं अगर दफ़न
14 जनवरी 2020
13 जनवरी 2020
जीवन और प्रेम पर आधारित हिंदी कविता छल छल और प्यार में से क्या चुनूँजो बीत गया उसे साथ ले कर क्यों चलूँपतंग जो कट गई डोर से वो खुद ही कब तक उड़ पायेगी हालात के थपेडों से बचाने को उसको फिर नयी डोर का सहारा क्यों न दूंजो शाख कभी फूलों से महकी रहती थी वो पतझड़ में वीरान हो चली
13 जनवरी 2020
09 जनवरी 2020
काश इश्क करने से पहले भी एक राज़ीनामा ज़रूरी हो जाये जो कोई तोड़े तो हो ऐसा जुर्मानाजो सबकी जेबों पर भारी हो जाये फिर देखो बेवज़ह दिल न फिसला करेंगे इश्क की गलियों से बच- बच निकला करेंगेवो ही पड़ेगा इसके चक्करों में,जो सारी शर्तों को राज़ी हो जाये कोई मनचला किसी कॉलेज के बाहर
09 जनवरी 2020
09 जनवरी 2020
काश इश्क करने से पहले भी एक राज़ीनामा ज़रूरी हो जाये जो कोई तोड़े तो हो ऐसा जुर्मानाजो सबकी जेबों पर भारी हो जाये फिर देखो बेवज़ह दिल न फिसला करेंगे इश्क की गलियों से बच- बच निकला करेंगेवो ही पड़ेगा इसके चक्करों में,जो सारी शर्तों को राज़ी हो जाये कोई मनचला किसी कॉलेज के बाहर
09 जनवरी 2020
06 जनवरी 2020
देखो फिर एक नया साल जुड़ गयाहर बात वही घात वहीफिर से उसे ठीक करने कानया ज़ज्बा जुड़ गयादेखो फिर एक नया साल जुड़ गयाबहुत कुछ देखा और सीखा बीते साल मेंबहुत कुछ मिला भी मुफलिसी के हाल मेंउस ऊपर वाले के करम से मैंमैं हर वार सह गयादेखो फिर एक नया साल जुड़ गयाकुछ मेरे अपने थे जो दूर
06 जनवरी 2020
06 जनवरी 2020
प्रेम पर आधारित हिंदी कविता ये ज़मीन ये ज़मीन जो बंजर सी कहलाती है बूँद जो गिरी उस अम्बर से, रूखे मन पर तो उस ज़मीन की दरारें भर सी जाती हैजहाँ तक देखती है , ये अम्बर ही उसने पाया है पर न जाने, उस अम्बर के मन में क्या समाया है कभी तो बादलों सा उमड़ आया है और कभी एक बूँद को भी
06 जनवरी 2020
06 जनवरी 2020
देखो फिर एक नया साल जुड़ गयाहर बात वही घात वहीफिर से उसे ठीक करने कानया ज़ज्बा जुड़ गयादेखो फिर एक नया साल जुड़ गयाबहुत कुछ देखा और सीखा बीते साल मेंबहुत कुछ मिला भी मुफलिसी के हाल मेंउस ऊपर वाले के करम से मैंमैं हर वार सह गयादेखो फिर एक नया साल जुड़ गयाकुछ मेरे अपने थे जो दूर
06 जनवरी 2020
15 जनवरी 2020
कल उस बात को एक साल हो गया वख्त नाराज़ था मुझसे न जाने कैसे मेहरबान हो गया मेरी धड़कन में आ बसा तू ये कैसा कमाल हो गयाकल उस बात को एक साल हो गया रोज़ दुआ भी पढ़ी और आदतें भी बदलीसिर्फ तेरी सलामती की चाहत रखना मेरा एक एकलौता काम हो गया कल उस बात को एक साल हो गया सिर्फ तू ही मे
15 जनवरी 2020
06 जनवरी 2020
देखो फिर एक नया साल जुड़ गयाहर बात वही घात वहीफिर से उसे ठीक करने कानया ज़ज्बा जुड़ गयादेखो फिर एक नया साल जुड़ गयाबहुत कुछ देखा और सीखा बीते साल मेंबहुत कुछ मिला भी मुफलिसी के हाल मेंउस ऊपर वाले के करम से मैंमैं हर वार सह गयादेखो फिर एक नया साल जुड़ गयाकुछ मेरे अपने थे जो दूर
06 जनवरी 2020
12 जनवरी 2020
ज़िन्दगी और प्रेम पर आधारित प्रेरणात्मक हिंदी कविता वख्त वख्त जो नहीं दिया किसी ने उसे छीनना कैसा उसे मांगना कैसा छिनोगे तो सिर्फ २ दिन का ही सुख पाओगे और मांगोगे तो लाचार नज़र आओगे छोड़ दो इसे भी वख्त के हाल पर जो जान कर सो गया , उसे जगाना कैसावख्त जो किसी के साथ गुज़ार आये
12 जनवरी 2020
09 जनवरी 2020
काश इश्क करने से पहले भी एक राज़ीनामा ज़रूरी हो जाये जो कोई तोड़े तो हो ऐसा जुर्मानाजो सबकी जेबों पर भारी हो जाये फिर देखो बेवज़ह दिल न फिसला करेंगे इश्क की गलियों से बच- बच निकला करेंगेवो ही पड़ेगा इसके चक्करों में,जो सारी शर्तों को राज़ी हो जाये कोई मनचला किसी कॉलेज के बाहर
09 जनवरी 2020
17 जनवरी 2020
प्रेम पर आधारित प्रेरक हिंदी कविता करम मेरे महबूब का करम मुझ पर जिसने मुझे, मुझसे मिलवाया है नहीं तो, भटकता रहता उम्र भर यूं ही मुझे उनके सिवा कुछ भी न नज़र आया है लोग इश्क में डूब कर फ़ना हो जाते हैं पर मैंने डूब करअपनी मंजिलोंको रु ब रु पाया है मेरे महबूब का करम मुझ पर जि
17 जनवरी 2020
24 दिसम्बर 2019
सर्दी की धूप प्रेम पर आधारित हिंदी कविताइश्क तेरा सर्दी की गुनगुनी धूप जैसा जो बमुश्किल निकलती है पर जब जब मुझ पर पड़ती है मुझे थोडा और तेरा कर देती है मैं बाहें पसारे इसकी गर्माहट को खुद में समा लेती हूँ इसकी रंगत न दिख जाये चेहरे में कही इसलिए खुद को तेरे सीने में छुपा
24 दिसम्बर 2019
08 जनवरी 2020
प्रेम और याद पर आधारित हिंदी कविता बारिशबारिश से कहो यूं न आया करे मुझे तेरा उनके बगैर आना अच्छा नहीं लगतातूने आने से पहले दस्तक तो दी थीसर्द मौसम में भिगोने की जुर्रत तो की थी जितना चाहे रिझा ले मुझको रूमानी हो केमुझे उनके बिना भीगना अच्छा
08 जनवरी 2020
12 जनवरी 2020
ज़िन्दगी और प्रेम पर आधारित प्रेरणात्मक हिंदी कविता वख्त वख्त जो नहीं दिया किसी ने उसे छीनना कैसा उसे मांगना कैसा छिनोगे तो सिर्फ २ दिन का ही सुख पाओगे और मांगोगे तो लाचार नज़र आओगे छोड़ दो इसे भी वख्त के हाल पर जो जान कर सो गया , उसे जगाना कैसावख्त जो किसी के साथ गुज़ार आये
12 जनवरी 2020
08 जनवरी 2020
प्रेम और याद पर आधारित हिंदी कविता बारिशबारिश से कहो यूं न आया करे मुझे तेरा उनके बगैर आना अच्छा नहीं लगतातूने आने से पहले दस्तक तो दी थीसर्द मौसम में भिगोने की जुर्रत तो की थी जितना चाहे रिझा ले मुझको रूमानी हो केमुझे उनके बिना भीगना अच्छा
08 जनवरी 2020
12 जनवरी 2020
ज़िन्दगी और प्रेम पर आधारित प्रेरणात्मक हिंदी कविता वख्त वख्त जो नहीं दिया किसी ने उसे छीनना कैसा उसे मांगना कैसा छिनोगे तो सिर्फ २ दिन का ही सुख पाओगे और मांगोगे तो लाचार नज़र आओगे छोड़ दो इसे भी वख्त के हाल पर जो जान कर सो गया , उसे जगाना कैसावख्त जो किसी के साथ गुज़ार आये
12 जनवरी 2020
20 जनवरी 2020
प्रेम में स्त्री की भावना को दर्शाती हिंदी कविता मेरा श्रृंगार तुमसे दर्पण के सामने खड़ी होकर, जब भी खुद को सँवारती हूँ उस दर्पण में तुमको साथ देख,अचरज में पड़ जाती हूँशरमाकर कजरारी नज़रें नीचे झुक जाती हैं पर कनखियों से तुमको ही देखा करती हैं यूं आँखों ही आँखों में पूछ लेती
20 जनवरी 2020
18 जनवरी 2020
नारी पर आधारित एक विचारणीय हिंदी कविता मेरे जैसी मैं मैं कहाँ मेरे जैसी रह गयी हूँ वख्त ने बदल दिया बहुत कुछमैं कोमलांगना से काठ जैसी हो गई हूँमैं कहाँ मेरे जैसी रह गयी हूँ समय के साथ बदलती विचारधारा ने मेरे कोमल स्वरुप कोएक किवाड़ के पीछे बंद तो कर दिया है पर मन से आज
18 जनवरी 2020
12 जनवरी 2020
ज़िन्दगी और प्रेम पर आधारित प्रेरणात्मक हिंदी कविता वख्त वख्त जो नहीं दिया किसी ने उसे छीनना कैसा उसे मांगना कैसा छिनोगे तो सिर्फ २ दिन का ही सुख पाओगे और मांगोगे तो लाचार नज़र आओगे छोड़ दो इसे भी वख्त के हाल पर जो जान कर सो गया , उसे जगाना कैसावख्त जो किसी के साथ गुज़ार आये
12 जनवरी 2020
09 जनवरी 2020
काश इश्क करने से पहले भी एक राज़ीनामा ज़रूरी हो जाये जो कोई तोड़े तो हो ऐसा जुर्मानाजो सबकी जेबों पर भारी हो जाये फिर देखो बेवज़ह दिल न फिसला करेंगे इश्क की गलियों से बच- बच निकला करेंगेवो ही पड़ेगा इसके चक्करों में,जो सारी शर्तों को राज़ी हो जाये कोई मनचला किसी कॉलेज के बाहर
09 जनवरी 2020
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x