रॉक गार्डन पर कविता

09 जनवरी 2020   |  शिल्पा रोंघे   (4475 बार पढ़ा जा चुका है)

रॉक गार्डन पर कविता

रॉक गार्डन पर कविता-



फ़र्क बस नज़रिये का था.


टूटी हुई चीज़ समझकर बेज़ान

मान लिया गया.


इक शख़्स ने जोड़ जोड़कर मुझे

खूबसूरत बागीचा बना लिया.


शिल्पा रोंघे


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