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14 जनवरी 2020
बाहुबली रणक्षेत्र की ओर कूच करते हैंरण जीत कर आते या मर कर अमर होते हैंजो शोषित सह कर आर्तनाद् करते हैंत्रुटिपुर्ण कुपरंपरा चला ये निरीहसम बनसमाज का सर्वथा अहित हीं करते हैंडॉ. कवि कुमार निर्मल
14 जनवरी 2020
25 जनवरी 2020
गु
गुरूर जिश्म ओ' हुनर का बेकार हो जाएगा।झुर्रियों से टपकता इश्क हीं---- रंग लाएगा।।निर्मल
25 जनवरी 2020
28 दिसम्बर 2019
बे
🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩बेटा बचाओ- बेटी बहु बन कहीं जा घर बसाएगी!जो बहु बन आए वह क्या (?) ''बेटी'' बन पाएगी!!सुसंस्कार वरण कर पिया का घर-संसार बसाएगी!उच्च घर में जा कर वह निखरेगी वा सकुचाएगी!!विदा करते तो शुभ कहते पुरोहित् अभिवावक हैं!माँ-बाप का हुनर समेटे, वही बनती बड़भागिन है!!बेटा पास बैठ
28 दिसम्बर 2019
09 जनवरी 2020
लद्द-फद्द हो,जग को देते हीं रहते हैं!क्या जग भीइनको भी उतना हीं देता है?जड़ से पत्तों तकऔषधीय गुण रहता है!हम मृदु वाणी त्याग कटु वचन का संबल लेते हैं!!फलों का स्वाद तुष्ट करता है!हम जीवन को ध्रिणा से भरते हैं!!लद्द-फद्द हो,जग को देते हीं रहते हैं!क्या जग भीइनको भी उतना हीं देता है?डॉ. कवि कुमार नि
09 जनवरी 2020
14 जनवरी 2020
❤❤💚💜💙💛💙❤❤💜💚❤प्रकृति पुरुष से है या फिर नारी से है!पिधला हिमखंड हीं बन जाता 'वारी' है!!पुरुष तैलिय दाहक तरल, नारी दाह्य कोमल बाती है! शक्ति संपात कर ज्योत प्रज्वलित वह करती है!! "अर्धनारीश्वर" की यही अमर गाथ, कहानी है! ऋषियों-देवों की यही सास्वत अमृत वाणी है!!💙💚💛 💜💗💜 💛💚💙ड
14 जनवरी 2020
04 जनवरी 2020
💐💐💐💐💐💐💐💐💐चित्तौड़ का राणा प्रताप कहाँ है? झाँसी की लक्ष्मी बाई कहाँ है??क्षत्रपति शिवाजी की तलवार कहाँ है? असली आजादी का जुनून गया कहाँ है?? शहिद दिवस पर श्रद्धांजलि मिल कर देते रहना! 'राजनीतिक आजादी' को झंडा फहराते रहना!!"सहोदर भाई" की प्रीत नहीं जब जानी! भूखे-नंगे की नम आँखें भी न पहचान
04 जनवरी 2020
07 जनवरी 2020
सुबह हो या फिर शाम होलबों पे बस तेरा नाम होहर काम में हम साथ होसपनों के तुम राजदार होलोगबाग तुझे भले महाकौल कहें,तुम बस एक मेरे श्याम होडॉ. कवि कुमार निर्मल
07 जनवरी 2020
18 जनवरी 2020
"साहिल"साहिल बहुत है दूरकिश्ती डगमगा रही हैबालू का आशियाना,हवा धमका रही हैडॉ. कवि कुमार निर्मल
18 जनवरी 2020
10 जनवरी 2020
अवतारअवतार यहीं है।अवतार यहीं है।।मन की परतों को खोल,छुप बैठा वहीं कहीं है।एषणा बुरी नहीं है।बुरी नहीं है।।अनाधिकृत घनसंचय है अपराध,विवेकपूर्ण वितरणसही है।सत्य जहाँ अढिग है,धर्म वहीं है।।साधना सेवा त्याग कासुपथ सही है।।अवतार यहीं है।अवतार यहीं है।।डॉ. कवि कुमार निर्मल
10 जनवरी 2020
03 जनवरी 2020
बचपन में खेलते, दौड़ते ठोकर लग कर गिर जाने पर भैया का मुझे हाथ पकड़ कर उठाना,भीड़ भरे रास्तों पर, फूल-सा सहेज कर अँगुली पकड़ स्कूल तक ले जाना,और आधी छुट्टी में माँ का दिया खानामिल-बाँट कर खाना, याद आता है। बहुत-बहुत याद आता है। सर्कस और सिनेमा देखते समय हँसना - खिलखिलाना,बे-बात रूठना-मनाना,फिर देर रात त
03 जनवरी 2020
05 जनवरी 2020
सारे अर्थ,निरर्थक हो गए।निकाले जो,तुमने मेरे इरादों के।खेल गया स्वार्थ,अपना खेल पहले ही।लगा दी बोली,भरे बाजार में,मेरे नादान जज्बातों की।बांधे रखी थी अब तक,डोर जो एक विश्वास की,पलभर में ही टूट गई,हर छड़ी वो आस की।खड़े रहे हम मौन,उन वीरान सड़कों पर।लहरा जाते समंदर,इन निर्दोष पलकों पर।समझ लिया होता गर,अर
05 जनवरी 2020
28 दिसम्बर 2019
झड़ने दो पुराने पत्तों को.🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂गिरने दो फूलों को जमीं पर.🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼कि नए पत्ते फिर आएंगे शाखों पर.🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿कि नए फूल फिर उगेंगे डाली पर.🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹ताकेंगे आसमान की ओर.🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴गिरने से मत डरो, झड़ने से ना डरो.बीज भी जमीन में गिरकर ही पौधे
28 दिसम्बर 2019
20 जनवरी 2020
राणा- शिवा- लक्ष्मीबाई को भूलजिन्ना नेहरु से मिल बँट रोते हो!तिरंगा फहराया नेता सुभाष नेसफेद टोपी पर जान झिड़कते हो!!बहुत घोटालों की जलेबी छानीसंकल्पों श्रिंखलाओं केमहाजाल में फँस सोते हो!जाग गई फिर सुभाष फौजविप्लव से भी तनिक नहीं डरते हो!!डॉ. कवि कुमार निर्मल
20 जनवरी 2020
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