नारी

14 जनवरी 2020   |  डॉ कवि कुमार निर्मल   (2934 बार पढ़ा जा चुका है)

नारी

❤💚💜💙💛💙❤❤💜💚❤
प्रकृति पुरुष से है या फिर नारी से है!
पिधला हिमखंड हीं बन जाता 'वारी' है!!
पुरुष तैलिय दाहक तरल, नारी दाह्य कोमल बाती है!
शक्ति संपात कर ज्योत प्रज्वलित वह करती है!!
"अर्धनारीश्वर" की यही अमर गाथ, कहानी है!
ऋषियों-देवों की यही सास्वत अमृत वाणी है!!
💙💚💛 💜💗💜 💛💚💙
डॉ. कवि कुमार निर्मल


अगला लेख: अवतार



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
18 जनवरी 2020
🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚बाल रूप में तुम प्रभु,एक जैसे हीं लगते हो।गुरुकुल में तुम अलग-अलग से हीं दिखते हो।।कभी "बरसाने" में रास रचातेकभी लंका दहन करवाते हो।कभी सुदामा के कच्चे चावल खाते,कभी भीलनी के जूठे बैर खाते हो।।शांत समाधि में कभी दिखते,कभी ''त्रिनेत्रधारी'' बनते हो।कभी दानव का वध तुम करते,कभी भस्मास
18 जनवरी 2020
19 जनवरी 2020
अमीरों के भगवान,महलों में पूूूूजे जाते है!भिक्षा-पात्र वाले साईं भक्त,झोपड़-पट्टी में धुनी रमाते हैं!!डॉ. कवि कुमार निर्मल
19 जनवरी 2020
18 जनवरी 2020
"साहिल"साहिल बहुत है दूरकिश्ती डगमगा रही हैबालू का आशियाना,हवा धमका रही हैडॉ. कवि कुमार निर्मल
18 जनवरी 2020
14 जनवरी 2020
हा
हाय पैसे तूने क्या किया ? हाय पैसे तूने क्या किया,मनुष्य को मनुष्य न रहने दिया,सारे बंधन और रिश्ते तूने,यों ही तोड़ा,मर्यादा तूने क्यों तोड़ा,हाय पैसा तूने क्या किया।मानव जन को तूने,कौन-सी खायी में ढकेला,सारी संवेदना की पड़ताल कर,मनुष्य
14 जनवरी 2020
03 जनवरी 2020
शंखनाद्शुभदिन आज भी आह्लादित कर जाएगापरम अराध्य का सामिप्य मन पा जाएगाप्रचण्ठ तृष्णा- सानिध्य की एषणा गहराई,सद्गुरु कृपा से सांजुज्य पा यह भक्त तर जाएगामैली चादर मन की धुल, आभा से भर जाएगाडॉ. कवि कुमार निर्मल
03 जनवरी 2020
25 जनवरी 2020
गु
गुरूर जिश्म ओ' हुनर का बेकार हो जाएगा।झुर्रियों से टपकता इश्क हीं---- रंग लाएगा।।निर्मल
25 जनवरी 2020
26 जनवरी 2020
राजनीतिक आजादी का कोई मोल है।आर्थिक आजादी अब तक रे गोल है।।खाली खजाना भर चलवाया जिनने,उनकी हीं होती सुहावनी हर भोर है।फूटपाथ से चुन खाये- जिनने तिनके,उनकी चौलों की छतों में कई होल हैं।।'आइ. पी. सी.' रट उतार लिया बचके,"अथर्व वेद" की ऋचाएँ सारी गोल हैं।अमीरों की उठ रही नित अट्टालिकायें,साधु चले
26 जनवरी 2020
08 जनवरी 2020
"इति" और "अंत"समाहृत जीवन पर्यंतमैं कोई हूँ नहीं- संतहै यही-"वाक्य आप्त"सद् गति करुँगा प्राप्तयह है मेरे ''मन की बात''चक्र 'नौ' है, नहीं हैं 'सात'दिन हो या फिर हो- रातकरना उसी एक बस बात"मानव" मेरी एक है जातसत्-संग यही, आज बाँटडॉ. कवि कुमार निर्मल
08 जनवरी 2020
09 जनवरी 2020
लद्द-फद्द हो,जग को देते हीं रहते हैं!क्या जग भीइनको भी उतना हीं देता है?जड़ से पत्तों तकऔषधीय गुण रहता है!हम मृदु वाणी त्याग कटु वचन का संबल लेते हैं!!फलों का स्वाद तुष्ट करता है!हम जीवन को ध्रिणा से भरते हैं!!लद्द-फद्द हो,जग को देते हीं रहते हैं!क्या जग भीइनको भी उतना हीं देता है?डॉ. कवि कुमार नि
09 जनवरी 2020
01 जनवरी 2020
लो बिन कहे मैं चुपके से आ गया हूँख़्वाबों को सबके- सजाने आ गया हूँतिलस्म नहीं, "सच" बन आ गया हूँ"चार" का मेरा यह आकड़ा नायाब हूँशुन्य से निकसा हुआ स्वर्णिम प्रभात हूँहर दिल की तमन्ना बन छा गया हूँ२०२० सतयुग लिए मैं आ गया हूँविश्व के नैतिकवादियों को समेट लाया हूँजाती-शरहदों को मिटाने आ गया हूँलबों की म
01 जनवरी 2020
14 जनवरी 2020
बाहुबली रणक्षेत्र की ओर कूच करते हैंरण जीत कर आते या मर कर अमर होते हैंजो शोषित सह कर आर्तनाद् करते हैंत्रुटिपुर्ण कुपरंपरा चला ये निरीहसम बनसमाज का सर्वथा अहित हीं करते हैंडॉ. कवि कुमार निर्मल
14 जनवरी 2020
11 जनवरी 2020
अग्नि मे तपकर, सोने की पहिचान होती है।नन्नी सी जान, देश की शान होती है।यही ज्योति सबके घर की उजाला होती है।नन्नी सी गुड़िया दिल की तारा होती है।।यही सम्मान यही दिल की जान होती है।नन्नी सी जान देश की शान होती है।।1।।ये ना समझ नादान, इनक
11 जनवरी 2020
सम्बंधित
लोकप्रिय
19 जनवरी 2020
04 जनवरी 2020
10 जनवरी 2020
10 जनवरी 2020
09 जनवरी 2020
09 जनवरी 2020
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x