Hindi poetry on Friendship - दोस्ती हिंदी कविता ; अर्चना की रचना

14 जनवरी 2020   |  अर्चना वर्मा   (2891 बार पढ़ा जा चुका है)

Hindi poetry on Friendship - दोस्ती हिंदी कविता ; अर्चना की रचना

चलो थोडा दिल हल्का करें

कुछ गलतियां माफ़ कर आगे बढें

बरसों लग गए यहाँ तक आने में

इस रिश्ते को यूं ही न ज़ाया करें

कुछ तुम भुला दो , कुछ हम भुला दें

कड़ी धूप में रखा बर्तन ही मज़बूत बन पाता है

उसके बिगड़ जाने का मिटटी को क्यों दोष दें

कुछ तुम भुला दो , कुछ हम भुला दें

यूं अगर दफ़न होना होता ,तो कब के हो गए होते

सिल लिए थे कई ज़ख़्म हम दोनों ने ,

तब जा के ये रिश्ते आगे बढें

कुछ तुम भुला दो , कुछ हम भुला दें

दोस्ती एक घर है जिसमे विचारों के बर्तन खड्केंगे ही

विचारों में है जो दूरियां उनको क्यों आकार दें

कुछ तुम भुला दो , कुछ हम भुला दें

यूं भावनाओं के आवेश में चार बातें निकल जाती हैं

उन बातों का मोल बढ़ा कर

अपनी अनमोल दोस्ती का मोल कम न करें

कुछ तुम भुला दो , कुछ हम भुला दें

अर्चना की रचना “सिर्फ लफ्ज़ नहीं एहसास”

Hindi poetry on Friendship - दोस्ती > अर्चना की रचना हिंदी कविता संग्रह

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