गुरुर

25 जनवरी 2020   |  डॉ कवि कुमार निर्मल   (371 बार पढ़ा जा चुका है)

गुरूर जिश्म ओ' हुनर का बेकार हो जाएगा।
झुर्रियों से टपकता इश्क हीं---- रंग लाएगा।।
निर्मल

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