आजादी

26 जनवरी 2020   |  डॉ कवि कुमार निर्मल   (6715 बार पढ़ा जा चुका है)

आजादी

राजनीतिक आजादी का कोई मोल है।
आर्थिक आजादी अब तक रे गोल है।।
खाली खजाना भर चलवाया जिनने,
उनकी हीं होती सुहावनी हर भोर है।
फूटपाथ से चुन खाये- जिनने तिनके,
उनकी चौलों की छतों में कई होल हैं।।
'आइ. पी. सी.' रट उतार लिया बचके,
"अथर्व वेद" की ऋचाएँ सारी गोल हैं।
अमीरों की उठ रही नित अट्टालिकायें,
साधु चले सारे गंगा सागर की ओर हैं।।
सत्तर साल की आजादी जनता देखी,
गरिबों को न दिख पाया ओर - छोर है।
राजनीतिक आजादी का कोई मोल है।
आर्थिक आजादी अब तक रे गोल है।।
डॉ. कवि कुमार निर्मल

अगला लेख: वसंत ऋतु आगमन्



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
25 जनवरी 2020
गु
गुरूर जिश्म ओ' हुनर का बेकार हो जाएगा।झुर्रियों से टपकता इश्क हीं---- रंग लाएगा।।निर्मल
25 जनवरी 2020
18 जनवरी 2020
"साहिल"साहिल बहुत है दूरकिश्ती डगमगा रही हैबालू का आशियाना,हवा धमका रही हैडॉ. कवि कुमार निर्मल
18 जनवरी 2020
19 जनवरी 2020
अमीरों के भगवान,महलों में पूूूूजे जाते है!भिक्षा-पात्र वाले साईं भक्त,झोपड़-पट्टी में धुनी रमाते हैं!!डॉ. कवि कुमार निर्मल
19 जनवरी 2020
03 फरवरी 2020
🍀🎄🍃🌿🌴🌴🌿🍃🎄वंसंत ऋतु के अद्भुत सौन्दर्य ने,मेरे हृदय में पुरजोर अगन है लगाई!🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥 🔥 🔥तुझे पाने की चाहत ने मेरे हिया में,अश्कों की नदियाँ कई बहवाई!!💦💦💦💦💦💦💦 💦 💦 प्रगाड़ नींद्रा से झकझोर मुझे तुमने जगाया!तन्द्रा को रक्तिम-तिव्र किरणों से दूर भगाया!!☀☀☀☀☀☀☀☀☀ ☀ ☀अहिर्निष तुम्ह
03 फरवरी 2020
03 फरवरी 2020
🍀🎄🍃🌿🌴🌴🌿🍃🎄वंसंत ऋतु के अद्भुत सौन्दर्य ने,मेरे हृदय में पुरजोर अगन है लगाई!🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥 🔥 🔥तुझे पाने की चाहत ने मेरे हिया में,अश्कों की नदियाँ कई बहवाई!!💦💦💦💦💦💦💦 💦 💦 प्रगाड़ नींद्रा से झकझोर मुझे तुमने जगाया!तन्द्रा को रक्तिम-तिव्र किरणों से दूर भगाया!!☀☀☀☀☀☀☀☀☀ ☀ ☀अहिर्निष तुम्ह
03 फरवरी 2020
20 जनवरी 2020
राणा- शिवा- लक्ष्मीबाई को भूलजिन्ना नेहरु से मिल बँट रोते हो!तिरंगा फहराया नेता सुभाष नेसफेद टोपी पर जान झिड़कते हो!!बहुत घोटालों की जलेबी छानीसंकल्पों श्रिंखलाओं केमहाजाल में फँस सोते हो!जाग गई फिर सुभाष फौजविप्लव से भी तनिक नहीं डरते हो!!डॉ. कवि कुमार निर्मल
20 जनवरी 2020
23 जनवरी 2020
"अंधेरा ना फटके! " ----------अन्धकार ना आये कुछ ऐसा जातां करो !सेना बन खड़े रहो ऐसी हूंकार भरो | *भारत का बच्चा -बच्चा जब तक पूर्णतया सच का लबादा लेकर ना उठकर जागेगा असत्य- हवा बहेगीहिल- हिल के कांपेगा ? * पाषाण पैच बनाकर सत्य लतियाता मिलेगाबहाने आसमान के वह धकियाता मिलेगाधरा पर आना
23 जनवरी 2020
25 जनवरी 2020
गु
गुरूर जिश्म ओ' हुनर का बेकार हो जाएगा।झुर्रियों से टपकता इश्क हीं---- रंग लाएगा।।निर्मल
25 जनवरी 2020
28 जनवरी 2020
कृष्णमहाभारत का पार्थ-सारथी नहीं,हमें तो ब्रज का कृष्ण चाहिए।राधा भाव से आह्लादित मित्रों का,साथ, चिर-परिचित लय-धुन-ताल चाहिए।।प्रेम की डोर तन कर,टूटी नहीं है कभी।अंत युद्ध का,हमें दीर्ध विश्राम चाहिए।।।प्रेम सरिता में आप्लावन,अतिरेक प्यार चाहिए।दानवों का अट्टाहस नहीं
28 जनवरी 2020
30 जनवरी 2020
कहानीदिवस और निशा कीहर भोर उषा की किरणों के साथशुरू होती है कोई एक नवीन कहानी…हर नवीन दिवस के गर्भ मेंछिपे होते हैं न जाने कितने अनोखे रहस्यजो अनावृत होने लगते हैं चढ़ने के साथ दिन के…दिवस आता है अपने पूर्ण उठान परतब होता है भान दिवस के अप्रतिम दिव्यसौन्दर्य का…सौन्दर्य ऐसा, जोकरता है नृत्य / रविकरों
30 जनवरी 2020
05 फरवरी 2020
दुनिया का जादुगरविश्व लीला एवम् विश्व मेलातुम्हारी हीं अद्भुत रचना है।तुम्हारे दर पर इबादतखुद पर जादुगरीहर आदमी करता है।।डॉ. कवि कुमार निर्मल
05 फरवरी 2020
28 जनवरी 2020
फु
शायरी
28 जनवरी 2020
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x