वसंतोत्सव

02 फरवरी 2020   |  डॉ कवि कुमार निर्मल   (4519 बार पढ़ा जा चुका है)

वसंतोत्सव

वसंत ऋतु का यह धराधाम
भारत भूखण्ड स्वागत् करता है


शिव भार्या प्रीये गंगा
जटा से बह निकली- सारा जग कहता है


झरनों की वक्र धारा बन इठला कर गंगा चलती हैं


पठारों पर दुस्तर पथ गह लम्बी यात्रा करती है


गंगा-सागर से मिल कपिल मुनि आश्रम तक जाती है


उत्तरांचल से चल पश्चिम तक भूमि सिंचित करती है


मकर संक्राति झेल गंगा उष्णता रवि किरणों संग बरसती है


समित उर्वरक शक्ति पुनर्सृजित हो कृषकों को भाती है


'हरित क्रांति' त्वरण हर वर्ष- स्मृद्ध बनाता है


वसंत ऋतु से जन आह्ललादित-

राष्ट्र प्रगति करता है


डॉ. कवि कुमार निर्मल
एम. बी. बी. एस. (१९७८)
बेतिया (बिहार)
9708055684

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