वसंत ऋतु की प्रथम कोपल

06 फरवरी 2020   |  डॉ कवि कुमार निर्मल   (3467 बार पढ़ा जा चुका है)

वसंत ऋतु की प्रथम कोपल

वसंत ऋतु और प्रथम कोपल


नैसर्गिक बीज एक नील गगन से-

पहला जब वसुन्धरा पर टपका

माटी की नमी से सिंचित हो वह-

ध्रुतगति से निकसा- चमका

प्रकाश की सुक्ष्म उर्जा- उष्णता

माटी से मिला पोषण संचित कर-

प्रथम अंकुरण बड़भागी वह पाया

अहोभाग्य, पहली कोपल फुटी!

लगा खोजने पादप नियंत्रक को--

पर वह नहीं कहीं मिल रे पाया--

हर पल महसूस किया सन्निकट,

भगवान् शब्द उचर कर उसको-

अपना परम अराध्य उसे बनाया

मानव अवतरित हो उसे-

हरि प्रसाद समझ कर खाया

पर अराध्य को पत्थर में--

जीवंत कर बैठा कर आह!

जल-पुष्प-अक्षत-तांबूल से

नित दिन पूजन में उसे चड़ाया

अंत काल में हरिनाम वह बिसराया

हर वर्ष वसंत ऐसे हीं आ भरमाया

डॉ. कवि कुमार निर्मल


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