मौन दुआएँ अमर रहेंगी !

09 फरवरी 2020   |  मीना शर्मा   (2461 बार पढ़ा जा चुका है)

श्वासों की आयु है सीमित

ये नयन भी बुझ ही जाएँगे !

उर में संचित मधुबोलों के

संग्रह भी चुक ही जाएँगे !

संग्रह भी चुक ही जाएँगे !!!

है स्पर्श का सुख भी क्षणभंगुर

पर मौन दुआएँ, अमर रहेंगी।


बगिया में अनगिन फूल खिले,

अमराई भी है बौराई ।

बेला फूला, तरुशाखाएँ

पल्लव पुष्पों से गदराईं ।

फूलों के कुम्हलाने पर भी,

मधुमास चले जाने पर भी !

मधुमास चले जाने पर भी !!!


खुशबू को फैलानेवाली

मदमस्त हवाएँ अमर रहेंगी।


नदिया में सिरा देना इक दिन

तुम गीत मेरे, पाती मेरी !

धारा में बहते दीपों संग

बहने देना थाती मेरी !

स्मृति में पावन पल भरकर

लौ काँपेगी कुछ क्षण थरथर !

लौ काँपेगी कुछ क्षण थरथर !!!


जलते दीपक बुझ जाएँगे

बहती धाराएँ अमर रहेंगी।


ये भाव निरामय, निर्मल-से

कोमलता में हैं मलमल-से

मन के दूषण भी हर लेंगे

ये पावन हैं गंगाजल-से !

मत रिक्त कभी करना इनको

ये मंगल कलश भरे रखना !

ये मंगल कलश भरे रखना !!!


ना तुम होगे, ना मैं हूँगी,

उत्सव की प्रथाएँ अमर रहेंगी ।






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रेणु
17 फरवरी 2020

न के दूषण भी हर लेंगे
ये पावन हैं गंगाजल-से !
मत रिक्त कभी करना इनको
ये मंगल कलश भरे रखना !
ये मंगल कलश भरे रखना !!!
ना तुम होगे, ना मैं हूँगी,
उत्सव की प्रथाएँ अमर रहें
प्रिय मीना , प्रेम के  सागर से  लहरों की भांति  उठते  दुआओं के  ये  प्रखर  स्वर ,  वेद की  ऋचाओं की भांति अनुगुंजित हो , मन को  असीम  शीतलता का आभास करवा रहे हैं | मौन दुआओं के ग्रन्थ नहीं लिखे गए , इनका कोई ऐतहासिक  दस्तावेज नहीं मिलता   , पर ये सृष्टि के कण -कण में सदैव व्याप्त रही हैं और सर्वत्र इनका अस्तित्व  बना रहेगा   | बहुत ही प्यारी रचना है जिसे काफी दिन पहले पढ़ लिया था  पर लिख ना सकी | ऐसी रचनाएँ हर रोज नहीं लिखी जाती | शब्द नगरी ने भी इसे  अपनी खास रचना बनाया था | ये बहुत गर्व की  बात है | सराहना से   परे रचना के लिए हार्दिक शुभकामनाएं|  

अलोक सिन्हा
12 फरवरी 2020

यह आपकी बहुत अच्छी रचना है | प्रोढ़ भी , गहन अनुभूतियों को संजोये भी | शब्द तो आप सदैव ही सरस व् कोमल प्रयोग करती हैं जो गीत को दुगना प्रभावोत्पादक बना देते हैं | बहुत बहुत शुभ कामनाएं |

मीना शर्मा
12 फरवरी 2020

बहुत बहुत आभार आदरणीय आलोक सर। आपसे प्रशंसा पाकर मन आनंद व उत्साह से भर उठा है !

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