मुक्तक

10 फरवरी 2020   |  महातम मिश्रा   (2359 बार पढ़ा जा चुका है)


"मुक्तक"


नया सवेरा हो रहा, फिर क्यों मूर्छित फूल।

कुछ रहस्य इसमें छुपा, मत करना फिर भूल।

बासी खाना देखकर, क्यों ललचायें जीव-

बुझ जाएगी चाँदनी, शूल समाहित मूल।।


नित नव राह दिखा रहे, कुंठा में हैं लोग।

बिना कर्म के चाहते, मिल जाए मन भोग।

सही बात पर चीखते, झूठों के सरदार-

समझ न आए नियम तो, कर लें थोड़ा योग।।


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुर

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आलोक सिन्हा
14 फरवरी 2020

बहुत सुन्दर , सटीक |

हार्दिक धन्यवाद आदरणीय

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कु
10 फरवरी 2020
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