प्रेम

26 फरवरी 2020   |  डॉ कवि कुमार निर्मल   (1871 बार पढ़ा जा चुका है)

प्रेम

भगवान् "प्रेम" का हीं दुजा नाम है।
न वो मूरत में या फिर मकान में है।।
उसे चाहते हो बँधु गर तुम पाना,
प्रेम का रास्ता बहुत हीं आसान है।
अंतरजगत में तीर्थाटन जो करता,
वही साघक सिद्ध और महान है।।
🙏 🙏 🙏निर्मल🙏 🙏 🙏
🙏👣ह👣रि👣प👣द👣🙏

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