पिता

29 फरवरी 2020   |  डॉ कवि कुमार निर्मल   (265 बार पढ़ा जा चुका है)

पिता

💖💖💖पिता💖💖💖


एषणाओं के भंवरजाल में
उलझ व्यर्थ हीं,
व्यथित हो इहजगत् को
न बँधु झुठलाओ।
तुममें है हुनर एवम्
है अदम्य सामर्थ्य,
अजपाजप गह
'सबका मालिक एक
कह नित महोत्सव मनाओ।।
हर साल "फादर्स डे" मना एक दिन
३६४ भूल जाते आखिर क्यों (?) तुम!
"पित्रि यज्ञ महामंत्र" नित्य उचर कर,
आशीर्वाद भरपूर बटोर कर
सदगति रे मन पा जाओ।।।


❄️डॉ. कवि कुमार निर्मल❄️

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