सपने

05 मार्च 2020   |  डॉ कवि कुमार निर्मल   (284 बार पढ़ा जा चुका है)

सपने

सपने


सुहावने सपनों के बाद सुहानी भोर आएगी


फिर वहीं शाम आ कर सपने नए सजाएगी


कौन जानता है (?) कल दस्तख़ दे उठाएगी


दिन में शौहरत पाँव चूम कर गले लगाएगी


कर दिया है जब खुद को- हवाले मालिक को


बिधना अपनी जादुगरी क्याकर (?)दिखाएगी


डॉ. कवि कुमार निर्मल

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