होली और होलिका दहन

09 मार्च 2020   |  डॉ कवि कुमार निर्मल   (292 बार पढ़ा जा चुका है)

होली और होलिका दहन

होली का अर्थ हुआ बँधुओं, हम भगवान् के होलिए
तन-मन-धन-समय-सांस-संकल्प भगवान् के लिए
भगवान् की ही अहेतुकी कृपा के फलस्वरुप हम हुए
विगत बातों को कहते हम सब- "होली" सो होली
शंकर के भक्त भ्रमित हो गटक रहे रे भंग की गोली
पवित्रता को फिरंगियों ने भी सहृदय कहा सदा होली
ये तीनों अर्थ हम सब के लिए शुभ, कल्याणकारी हैं
कतिपय परंपराएं हमारी बहुत हीं न्यारी, हितकारी हैं
भगवान के हितोपदेश पढ़ें- हम सब उनके आभारी हैं
बीती बातों का चिंतन न कर जीवन को दिव्यता से भरलें
ऐसी सच्ची होली मनानी हमको हैं मन आलोकित करलें
🔥🔥🔥 होलिका दहन🔥🔥🔥
अचेतन मन में ना जाने कितनी इच्छायें
कितने प्रदूषित बिचार कितनी ईर्ष्यायें
अंदर ही अंदर चेतना को बोझिल और
प्रदूषित एवं अतिविछुब्द हमें करती आई हैं
होली का यह महोत्सव आज हम सबको
आह्ललाद प्यार बांटने का सुअवसर देता है
आज मन में जमा इस सारे कूड़े- कचरे को
फेंक चेतना को हल्का और निर्मल बनाते है
इस पावन अवसर पर बाहर और भीतर- दोनों जगहें
स्वच्छ और पवित्र रहने के महासंकल्प फिर दुहराते हैं
आएं आज मिल-जुल कर दिव्य होलिका दहन मनाते हैं
सुधिजनों को ईश्वरीय होली की शुभ कामनाएं जताते हैं


🙏💐डॉ• के• के•निर्मल💐🙏

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