झारण्डी

10 मार्च 2020   |  डॉ कवि कुमार निर्मल   (268 बार पढ़ा जा चुका है)

झारण्डी

ओ' मेरे रंगरेज़ बता कैसे- तेरे रंगों से मैं भर जाऊँ?

विधा न आवे, राग नहीं; कैसे गीत गा तुझे रिझाऊँ??

निर्मल

झारण्डी

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