पिता के अश्रु

14 मार्च 2020   |  आलोक कौशिक   (272 बार पढ़ा जा चुका है)

पिता के अश्रु

बहने लगे जब चक्षुओं से

किसी पिता के अश्रु अकारण

समझ लो शैल संतापों का

बना है नयननीर करके रूपांतरण


पुकार रहे व्याकुल होकर

रो रहा तात का अंतःकरण

सुन सकोगे ना श्रुतिपटों से

हिय से तुम करो श्रवण


अंधियारा कर रहे जीवन में

जिनको समझा था किरण

स्पर्श करते नहीं हृदय कभी

छू रहे वो केवल चरण


:- आलोक कौशिक


संक्षिप्त परिचय:-


नाम- आलोक कौशिक

शिक्षा- स्नातकोत्तर (अंग्रेजी साहित्य)

पेशा- पत्रकारिता एवं स्वतंत्र लेखन

साहित्यिक कृतियां- प्रमुख राष्ट्रीय समाचारपत्रों एवं साहित्यिक पत्रिकाओं में दर्जनों रचनाएं प्रकाशित

पता:- मनीषा मैन्शन, जिला- बेगूसराय, राज्य- बिहार, 851101,

अणुडाक- devraajkaushik1989@gmail.com

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