👹👿👹 "कोरोना" 👹👿👹

16 मार्च 2020   |  डॉ कवि कुमार निर्मल   (273 बार पढ़ा जा चुका है)

👹👿👹 "कोरोना" 👹👿👹

👿👹👿👹👿👹👿👹👿👹👿
कोरोना! कोरोना!! कोरोना!!!

उचर कर

त्राहिमाम् - त्राहिमाम् सब चिल्लाते हो!
फैल रही चहुंदिश तामसिकता को
तौल नहीं तुम रे मानव पाते हो!!
कार्निभोरस नहीं तन से पर-
भक्षण कर विष उगल रहे हो!
समय अभी भी है बाकि,
चेत सात्विकता नहीं गह पाते हो!!

डॉ. कवि कुमार निर्मल

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