पानी

17 मार्च 2020   |  PRATHAM BHALA   (1592 बार पढ़ा जा चुका है)

मछली जिसमे रहती है ,

जिसे अपना घर कहती है,

जल ही है वो जीवनधारा ,

जो हर नदी में बहती है ।


कभी बारिश की बुँदे बनकर

पौधों की प्यास बुझती है

इठलाती और बलखाती फिर

वसुधा की गोद में समा जाती है ।


शक्ति जिसकी अपार है ,

समुद्री जीवों का जो संसार है ,

पंचतत्वों में से एक है वो ,

जो जीवन का आधार है ।


जिसकी शीतलता को पाकर

अग्नि भी शांत हो जाती है ,

जल ही है वो जीवनधारा

जो हर आग बुझती है।


सभी जीवों की जान है पानी

जीवन का जन्मस्थान है पानी ,

हर प्यासे की जो प्यास बुझा दे

उस अमृत का नाम है पानी ।

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