बहन

23 मार्च 2020   |  आलोक कौशिक   (303 बार पढ़ा जा चुका है)

बहन

दिखती है जिसमें

मां की प्रतिच्छवि

वह कोई और नहीं

होती है बान्धवि


जानती है पढ़ना

भ्राता का अंतर्मन

अंतर्यामी होती है

ममतामयी बहन


है जीवन धरा पर

जब तक है वेगिनी

उत्सवों में उल्लास

भर देती है भगिनी


:- आलोक कौशिक


संक्षिप्त परिचय:-


नाम- आलोक कौशिक

शिक्षा- स्नातकोत्तर (अंग्रेजी साहित्य)

पेशा- पत्रकारिता एवं स्वतंत्र लेखन

साहित्यिक कृतियां- प्रमुख राष्ट्रीय समाचारपत्रों एवं साहित्यिक पत्रिकाओं में दर्जनों रचनाएं प्रकाशित

पता:- मनीषा मैन्शन, जिला- बेगूसराय, राज्य- बिहार, 851101,

अणुडाक- devraajkaushik1989@gmail.com

अगला लेख: डॉग लवर



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
28 मार्च 2020
विध्वंसक धुंध से आच्छादितदिख रहा सृष्टि सर्वत्र किंतु होता नहीं मानव सचेत कभी प्रहार से पूर्वत्र सदियों तक रहकर मौन प्रकृति सहती अत्याचार करके क्षमा अपकर्मों को मानुष से करती प्यार आती जब भी पराकाष्ठा पर मनुज का अभिमान दंडित करती प्रकृति तब अपराध होता दंडमान पशु व पाद
28 मार्च 2020
31 मार्च 2020
नी
पूछा राही ने वृक्ष से - "क्यों फलोंसे सजा है ? तू नीम है,तेरी कड़वाहट तो सजा है ।फिर क्यों बार-बार निबौली बनाते हो ? अपनी शक्ति को इसमें क्यों लगाते हो ?" नीम ने कहा - "जैसे गुलाब और कांटोंका किस्सा है,तुम्हारे लिये बेकार ये निबौली भी मेराहिस्सा है ।अनुशासित व्यवहार तो समय के स
31 मार्च 2020
30 मार्च 2020
हमने गरीब बन कर जन्म नहीं लिया था हां, अमीरी हमें विरासत में नहीं मिली थी हमारी क्षमताओं को परखने से पूर्व ही हमें गरीब घोषित कर दिया गया किंतु फिर भी हमने इसे स्वीकार नहीं किया कुदाल उठाया, धरती का सीना चीरा और बीज बो दिया हमारी मेहनत रंग लाई, फसल लहलहा उठी प्रसन्नता नेत्रों के रास्ते हृदय में पहुं
30 मार्च 2020
25 मार्च 2020
इं
इंद्रधनुषचिड़िया ने जब वर्षा के बाद सर उठाया, सामने चमचमाता हुआ इंद्रधनुषी दृष्य पाया ।घोंसले से देखा उसने दूर वादियों में,विशाल रंगबिरंगी काया दो पर्वतों के बीच में ।उस तक पहुंचने की चाह में बेसुध उड़ चलाइच्छा तीव्र हो तो भूख-प्यास क्या भला ?रास्ते में सर्द हवा, चील
25 मार्च 2020
30 मार्च 2020
<!--[if gte mso 9]><xml> <w:WordDocument> <w:View>Normal</w:View> <w:Zoom>0</w:Zoom> <w:TrackMoves></w:TrackMoves> <w:TrackFormatting></w:TrackFormatting> <w:PunctuationKerning></w:PunctuationKerning> <w:ValidateAgainstSchemas></w:Val
30 मार्च 2020
02 अप्रैल 2020
त्याग का पर्याय प्रतीक शौर्य का पुरुषों में उत्तम संहर्ता क्रौर्य का परहित प्रियता भ्राताओं में ज्येष्ठ कर्तव्य परायण नृप सर्वश्रेष्ठ शरणागत वत्सल हैं आश्रयदाता दशरथ नंदन भाग्य विधाता भजे मुख मेरा तेरा ही नाम जय सिया राम जय श्री राम :- आलोक कौशिक संक्षिप्त परिचय:-नाम-
02 अप्रैल 2020
11 मार्च 2020
ओमप्रकाश भारतीय उर्फ पलटू जी शहर के सबसे बड़े उद्योगपति होने के साथ ही फेमस डॉग लवर अर्थात् प्रसिद्ध कुत्ता प्रेमी भी थे। पलटू जी ने लगभग सभी नस्ल के कुत्ते पाल रखे थे। उन्हें कुत्तों से इतना प्रेम था कि कुत्तों के मल-मूत्र भी वे स्वयं साफ किया करते थे। उनके श्वान प्रेम पर अखबार एवं पत्रिकाओं में सै
11 मार्च 2020
21 मार्च 2020
🐚🐚 कहानी कृष्ण की 🐚🐚 🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️"कृष्ण जन्माष्टमी" हम हर्षित हो मनाते हैं।"कृष्ण लीला" आज हम सबको सुनाते हैं।।कारागृह में ''महासंभूति'' का अवतरण हुआ।दुष्ट कंस का कहर, जन जन का दमन हुआ।।जमुना पार बासु यशोधा के घर कृष्ण को पहुँचाये।''पालक माँ'' को ब्रह्माण्ड मुख गुहा में प्
21 मार्च 2020
24 मार्च 2020
स्
अँधेरे में तो परछाई भी साथ छोड़ देती है जनाब हम तो फिर भी इंसान है औरों की किसी को फिकर नहीं बस खुद पर सब कुर्बान है ।
24 मार्च 2020
14 मार्च 2020
बहने लगे जब चक्षुओं से किसी पिता के अश्रु अकारण समझ लो शैल संतापों का बना है नयननीर करके रूपांतरण पुकार रहे व्याकुल होकर रो रहा तात का अंतःकरण सुन सकोगे ना श्रुतिपटों से हिय से तुम करो श्रवण अंधियारा कर रहे जीवन में जिनको समझा था किरण स्पर्श करते नहीं हृदय कभी छू रहे वो केवल चरण :- आलोक कौशिक संक्षि
14 मार्च 2020
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x