कोरोना का कहर और सृजन

24 मार्च 2020   |  डॉ कवि कुमार निर्मल   (293 बार पढ़ा जा चुका है)

कोरोना का कहर और सृजन

कोरोना का कहर और सृजन



सम्मेलनों और कवि -गोष्ठियों की चहुँदिसि मची धूम है
हर ओर शंखनाद् गुँजायमान्,

कीर्तन का शोर है
नगमों-नज़्मों में अगन,

टपका कलमों से ओज है
मन की जमी हुई भडास

सारी है आज निकस रही
गुर्गों की नजर शर्म से उफ़!

कत्तई झुक नहीं रही
वख्त है, चेत जा;

आ रही कोरोना की बौछार है
नफरत नहीं किसी से,

विश्व बँधुत्व का इंतजार है


डॉ. कवि कुमार निर्मल

कोरोना का कहर और सृजन

अगला लेख: समय की पुकार



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
28 मार्च 2020
"कोरोना कुछ करो ना"कोरोना! कोरोना!! अब और कोई कुछ कहो ना।अलविदा कह मरे, ऐसा कुछ जतन करो ना।।चक्के थमे निजी वाहनों के, अब तो डरो ना।दान दिए एम पी-एम एल ए ने, ₹ गिनो ना।।शिरडी के साईं मंदिर ट्रस्ट ने दिए ५१ करोड़,बाकी भी आगे बढ़ें- खुल कर दान करो ना।हे महामहिम ट्रंप, चीन से बात आज करो ना।।रिक्त
28 मार्च 2020
31 मार्च 2020
कोरोना से कवि धायल!कोरोना का कहर देखलेखनी थमी हरजाई है!भूत को बिसरा- भयाक्रांत,आगे ज्यों खाई है!!अभूतपूर्व सौहार्दपूर्णता शुभ-चहुंदिश छाई है!'क्वारेन्टाइन' से कजाकोरना की बन आई है!!आर्थिक बिपदायें तोकई बार आ हमें रुलाई है!संकट पार हुए सारे,हर घर में खुशियां छाई है!!हौसला पुरजोर- बुलंद इरादे,थका नहीं
31 मार्च 2020
16 मार्च 2020
👿👹👿👹👿👹👿👹👿👹👿कोरोना! कोरोना!! कोरोना!!!उचर करत्राहिमाम् - त्राहिमाम् सब चिल्लाते हो!फैल रही चहुंदिश तामसिकता कोतौल नहीं तुम रे मानव पाते हो!!कार्निभोरस नहीं तन से पर-भक्षण कर विष उगल रहे हो!समय अभी भी है बाकि,चेत सात्विकता नहीं गह पाते हो!!डॉ. कवि कुमार निर्मल
16 मार्च 2020
20 मार्च 2020
को
🙏कोरोना की विदाई🙏"कोरोना" की कर रहाचीन विदाई!भारत क्योंकर करे उनकी भरपाई?ठप्प हुआ आयात, आगे नाम मत लेनामेरे भाई।कैलाश-मानसरोवर लौटाए, भला करेगा उनका साईं।डॉ. कवि कुमार निर्मल
20 मार्च 2020
18 मार्च 2020
उँचे सपने बिखर जाते हैं-बालू के टिब्बे की तरह!संतोष के गहने-चमक जाते हैं सोने की तरह!!DrKavi Kumar Nirmal
18 मार्च 2020
24 मार्च 2020
स्
अँधेरे में तो परछाई भी साथ छोड़ देती है जनाब हम तो फिर भी इंसान है औरों की किसी को फिकर नहीं बस खुद पर सब कुर्बान है ।
24 मार्च 2020
11 मार्च 2020
आज का हालआमरण हड़ताल, मांगों की बौछारनिर्जला व्रतों का गगनचुंबी पहाड़वृद्धों का अनादर एवम् तिरस्कारउदारता से नहीं है तनिक सरोकारबंद कमरे से चलती रही आज की सरकारईर्श्या-द्वेष-ध्रिणा मात्र- नहीं तनिक रे प्याररिस्तों का झूठला कर, गैरों से पनपा प्यारपरिवार यत्र-तत्र टूट
11 मार्च 2020
12 मार्च 2020
★★★★★उल्फ़त★★★★★क़ायनात के मालिक का वारिस,भिखारी बन छुप अश्क बहाता है।सर्वनिगलु एक अमीरजादा,खोटे सिक्के की बोरी पाता है।।🌵🌵🌵🌵🌵🌵🌵🌵सुना है इश्क 'खास महिने' मेंशिकार कर सवँरता हैं !हुश्न पे एतवार कर,"मुकम्मल" फना होता है!!🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂उड़ता रहा ख्यालों में तेरेउम्मीदों से गुल खिले मेरे💮💮💮💮💮�
12 मार्च 2020
01 अप्रैल 2020
कविताशहर प्रयोगशाला हो गया हैविजय कुमार तिवारीछद्मवेष में सभी बाहर निकल आये हैंं,लिख रहे हैं इतिहास में दर्ज होनेवाली कवितायें,सुननी पड़ेगी उनकी बातेंं,देखना पड़ेगा बार-बार भोला सा चेहरा।तुमने ही उसे सिंहासन दिया है,और अपने उपर राज करने का अधिकार।दिन में वह ओढ़ता-बिछाता है तुम्हारी सभ्यता-संस्कृति,उ
01 अप्रैल 2020
31 मार्च 2020
नी
पूछा राही ने वृक्ष से - "क्यों फलोंसे सजा है ? तू नीम है,तेरी कड़वाहट तो सजा है ।फिर क्यों बार-बार निबौली बनाते हो ? अपनी शक्ति को इसमें क्यों लगाते हो ?" नीम ने कहा - "जैसे गुलाब और कांटोंका किस्सा है,तुम्हारे लिये बेकार ये निबौली भी मेराहिस्सा है ।अनुशासित व्यवहार तो समय के स
31 मार्च 2020
10 मार्च 2020
ओ' मेरे रंगरेज़ बता कैसे- तेरे रंगों से मैं भर जाऊँ?विधा न आवे, राग नहीं; कैसे गीत गा तुझे रिझाऊँ??निर्मल
10 मार्च 2020
21 मार्च 2020
🐚🐚 कहानी कृष्ण की 🐚🐚 🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️"कृष्ण जन्माष्टमी" हम हर्षित हो मनाते हैं।"कृष्ण लीला" आज हम सबको सुनाते हैं।।कारागृह में ''महासंभूति'' का अवतरण हुआ।दुष्ट कंस का कहर, जन जन का दमन हुआ।।जमुना पार बासु यशोधा के घर कृष्ण को पहुँचाये।''पालक माँ'' को ब्रह्माण्ड मुख गुहा में प्
21 मार्च 2020
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x