जमुना किनारे कन्हैया पधारे

25 मार्च 2020   |  आद्या कात्यायनी   (283 बार पढ़ा जा चुका है)

जमुना किनारे, कन्हैया पधारे

जमुना किनारे, कन्हैया पधारे ।

वृंदावन घाट पे बंसी पुकारे ॥

मनमोहिनी तान जब मधुबन में गूंजे;

थिरकती पवन को दिशा भी न सूझे ।

हर जीव के मन में मुरली रच जाये;

मोहन के मोह से कैसे बचा जाये ?

गाय बछ्ड़े गोपाल के पास आकर बैठ गये;

मोर प्रेम वर्षा में सहज ही झूम गये ।

पक्षियों का स्वर भी संगीत के साथ में;

भंवरे भी मधु छोड़ माधव के पास में ॥

ग्वाल बाल खेल रोक नाच रहे हर्ष से ;

गोपियां घर-बार त्याग दौड़ आईं गांव से

कण-कण में आकर्षण जागृत है कृष्ण का;

भूल चुका हर कोई समय लोक धर्म क्या ?

ज्यों ही सांवरे ने सुर को विराम दिया ;

कमलनयन खोलकर जब विस्मय से प्रश्न किया ।

"आप सब यहां कैसे ? मुझसे ना छुपायें"

तब माया से ग्रस्त प्राणी, मायाधारी को क्या बतायें ?

---*--- - आद्या "कात्यायनी"

अगला लेख: नीम की निबौली



धन्यवाद !

आलोक सिन्हा
26 मार्च 2020

बहुत सुन्दर

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