शहर प्रयोगशाला हो गया है

01 अप्रैल 2020   |  विजय कुमार तिवारी   (9716 बार पढ़ा जा चुका है)

कविता
शहर प्रयोगशाला हो गया है
विजय कुमार तिवारी

छद्मवेष में सभी बाहर निकल आये हैंं,
लिख रहे हैं इतिहास में दर्ज होनेवाली कवितायें,
सुननी पड़ेगी उनकी बातेंं,
देखना पड़ेगा बार-बार भोला सा चेहरा।
तुमने ही उसे सिंहासन दिया है,
और अपने उपर राज करने का अधिकार।
दिन में वह ओढ़ता-बिछाता है तुम्हारी सभ्यता-संस्कृति,
उतार फेंंकता है हर रात, दिन में पहनी हुई मालायें,
चेहरे पर पुता हुआ किसी मन्दिर का तिलक-चंदन।
रात में आते हैं अनुचर,सारे के सारे उसके मतावलम्बी,
निबटाये जाते हैं सारे जरुरी काम,,
बांटी जाती है सबके हिस्से की रेवड़ियाँं।
शहर प्रयोगशाला हो गया है,
लोग लगे रहते हैं अपने-अपने कामों में।.
उसे पता है-लेना है किससे,कौन सा काम?
कब,किससे क्या बोलना है?किसको पहनानी है कौन सी टोपी?
पहले बहुत बोलता था,अब चुप रहता है,
बांटता रहता है-मुफ्त की सारी चीजें,
तुम्हें सौ देता है,अपने लोगों को लाखों और अपने लिए पूरा खजाना।
दंगे हों या सैकड़ो दिनों का धरना,वह मौन रहता है।
चुपचाप होने देता है शहर के भीतर धर्म-प्रचार का खेल,
सहायक होता है संक्रमित लोगों को पूरे देश में फैल जाने में,
रातों-रात पहुँचा देता है कमजोर,लाचार मजदूरों को अपनी सीमा के पार,
वायरस लिये निकल पड़ते हैं लोग पूरे देश को संक्रमित करने।
यह वायरस खत्म हो जायेगा एक दिन,
लेकिन तुम्हारा चुना हुआ वायरस तुम्हें ही दूर करना होगा।

अगला लेख: मेरे आनंद की बाते



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
07 अप्रैल 2020
वि
विपत्ति में हीविजय कुमार तिवारीप्राचीन मुहावरा है,"विपत्ति में ही अच्छे-बुरे की पहचान होती है।"मानवता के सामने सबसे भयावह और संहारक परिस्थिति खड़ी हुई है।पूरी दुनिया बेबस और लाचार है।हमारे विकास के सारे तन्त्र धरे के धरे रह गये हैं।कुछ भी काम नहीं आ रहा है।स्थिति तो यह हो गयी है कि जो जितना विकसित ह
07 अप्रैल 2020
08 अप्रैल 2020
कविताहमउम्र बूढ़ोंं का परिवारविजय कुमार तिवारीमैंने सजा लिया है सारे हमउम्र बूढ़ों को अपने फ्रेम में,बना लिया है मित्रों का बड़ा सा समूह। रोज देखता रहता हूँ उनके आज के चेहरे,चमक उठती है पुतलियाँजीवन्त हो उठते हैं उनसे जुडे नाना प्रसंग। मुरझाये गालों और मद्धिम रोशनी लिये आँखें,आज भी कौंंध जाता है उनक
08 अप्रैल 2020
02 अप्रैल 2020
मज़हबी रफ़्तार जरा थम जाएहर आदमी घर में- सिमट जाएफिक्र हो गर 'अहले वतन' कीतो हर किरदार बन सँवर जाएकवि कुमार निर्मल
02 अप्रैल 2020
30 मार्च 2020
<!--[if gte mso 9]><xml> <w:WordDocument> <w:View>Normal</w:View> <w:Zoom>0</w:Zoom> <w:TrackMoves></w:TrackMoves> <w:TrackFormatting></w:TrackFormatting> <w:PunctuationKerning></w:PunctuationKerning> <w:ValidateAgainstSchemas></w:Val
30 मार्च 2020
02 अप्रैल 2020
'कविता मौन ही होती है...’ मेरे द्वारा लिखित कविताओं का संग्रह है जो भिन्न-भिन्न समय और मानसिक अवस्था में लिखी गयीं हैं. कविता भावनाओं की अभिव्यक्ति होती है जिसमें व्यक्ति एक अलग ही तरह का मानसिक सुख पाता है. यह सुख व्यक्तिगत होता है लेकिन कई बार यह व्यक्तिगत से सार्वजनिक भाव भी रखता है.भावनाएं कभी स
02 अप्रैल 2020
31 मार्च 2020
धि
धिक्कार है ऐसे लोगोंं परविजय कुमार तिवारीमन दहल उठता है।लाॅकडाउन में भी लाखों की भीड़ सड़कों पर है।भारत का प्रधानमन्त्री हाथ जोड़कर विनती करता है,आगाह करता है कि खतरा पूरी मानवजाति पर है।विकसित और सम्पन्न देश त्राहि-त्राहि कर रहे हैं।विकास और ऐश्वर्य के बावजूद वे अपनी जनता को बचा नहीं पा रहे हैं।आज
31 मार्च 2020
02 अप्रैल 2020
रश्मि के नाम कुछ खत... (कविता-संग्रह)‘रश्मि के नाम कुछ खत...’ मेरे द्वारा लिखित कविताओं का संग्रह है जो भिन्न-भिन्न समय और मानसिक अवस्था में लिखी गयीं हैं. कविता भावनाओं की अभिव्यक्ति होती है, जिसमें व्यक्ति एक अलग ही तरह का मानसिक सुख पाता है. यह सुख व्यक्तिगत होता है ल
02 अप्रैल 2020
03 अप्रैल 2020
पा
हस्तिनापुर छोड़, पाण्डव नव नगरी जब आये,छोड़ कौरव, बन्धु - बान्धव संग तब लाये।देख इन्द्रप्रस्थ, चकित रह गया दुर्योधनअपमानित करने को आतुर उसका ईर्ष्यालू मन।।द्यूत क्रीडा करने की उसने घृणित चाल अपनाई,मामा शकुनि संग आमंन्त्रण की तुच्छ नीति बनाई।एक ओर पारंगत शकुनि, नवसिखिये पाण्
03 अप्रैल 2020
15 अप्रैल 2020
खू
कहानीखूबसूरत आँखोंवाली लड़की-6विजय कुमार तिवारीप्रमोद बाबू दोनो महिलाओं और मोहन चन्द्र जी की भाव-भंगिमा देख दंग रह गये।सुबह दूध वाले की बातें सत्य होती प्रतीत होने लगी।उन्होंने मौन रहना ही उचित समझा।अन्दर से पत्नी भी आ गयी।मोहन चन्द्र बाबू उन दोनो महिलाओं से कुछ पूछते-बतियाते रहे।थोड़ी देर में पत्नी
15 अप्रैल 2020
21 मार्च 2020
🐚🐚 कहानी कृष्ण की 🐚🐚 🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️"कृष्ण जन्माष्टमी" हम हर्षित हो मनाते हैं।"कृष्ण लीला" आज हम सबको सुनाते हैं।।कारागृह में ''महासंभूति'' का अवतरण हुआ।दुष्ट कंस का कहर, जन जन का दमन हुआ।।जमुना पार बासु यशोधा के घर कृष्ण को पहुँचाये।''पालक माँ'' को ब्रह्माण्ड मुख गुहा में प्
21 मार्च 2020
27 मार्च 2020
जि
कहानीजिन्दगी सुखद संयोगों का खेल है।विजय कुमार तिवारीरमणी बाबू को भगवान में बहुत श्रद्धा है।उसके मन मेंं यह बात गहरे उतर गयी है कि अच्छे दिन अवश्य आयेंगे।अक्सर वे सुहाने दिनों की कल्पना में खो जाते हैं और वर्तमान की छोटी-छोटी जरुरतों की लिस्ट बनाते रहते हैं।गाँव के लड़के स्कूल साईकिल पर जाते थे तो व
27 मार्च 2020
24 मार्च 2020
🙏🙏 समय की पुकार🙏🙏निरीह पशु-पँछियों को अपनीक्षुधा का समान मत बनाओइनमें जीवन है, इनको अपनोंसे वंचित कर रे नहीं तड़पाओखाद्यान्न प्रचूर है, और उगाओ"अहिंसा" का सुमार्ग अपनाओ🌳🌲🌼🌺🌷🌺🌼🌲🌳सौन्दर्य वर्धन हो धरा काशुन्य पर मत सब जाओपशु-पादप-वृक्ष-ताल-तलैया के
24 मार्च 2020
12 अप्रैल 2020
खू
कहानीखूबसूरत आँखोंवाली लड़की-2विजय कुमार तिवारीप्रमोद बाबू भी इस माहौल से अछूते नहीं रहे।उनका मिलना-जुलना शुरु हो गया।कार्यालय में बहुत लोगों के काम होते जिसे बड़े ही सहृदय भाव से निबटाते और कोशिश करते कि किसी को कोई शिकायत ना हो।स्थानीय लोगों से उनकी अच्छी जान-पहचान हो गयी है।सुरक्षा बल के लोगों के
12 अप्रैल 2020
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x