बस इसलिए

28 अप्रैल 2020   |  नीतू टिटाण   (288 बार पढ़ा जा चुका है)

सो गया है देश मेरा कि सब आलस से ग्रस्त हैं

शायद इसीलिए अभी तक मेरे भारत में विकास का सूर्य अस्त है


एक जवान खड़ा सरहद पर जान की बाजी लगा रहा

लेकिन देश का नेता बस चुनाव की महफिल सजा रहा

सारी अर्थव्यवस्था क्यों बताओ पस्त है

शायद इसीलिए अभी तक मेरे भारत में विकास का सूर्य अस्त है



जब वो सीख गए सीने पर खाना गोलियां

तो क्यों बोल रहे हम केवल जहर भरी बोलियां

भ्रष्ट नेताओं की टोली क्यों इतनी मस्त है

शायद इसीलिए अभी तक मेरे भारत में विकास का सूर्य अस्त है


एक अफवाह पर टिक गई सभी की क्यों सोच है

यह और कुछ नहीं दोस्तों एक दिमागी मोच है

जगह-जगह अफवाहें लगा रही है क्यों गश्त हैं

शायद इसीलिए अभी तक मेरे भारत में विकास का सूर्य अस्त है



इस राजनीति के चक्कर में गरीब ही लुट जाता है

नहीं खुश फिर भी शायद विज्ञापन में उसे दिखाना पड़ जाता है

एक नहीं साहेब फंसा इस भँवर में ये जहां समस्त है

इसीलिए शायद अभी तक मेरे भारत में विकास का सूर्य अस्त है


लोलुप्ता और चाटुकारिता अब यहां के मुख्य कार्य हैं

जो मुझे सब दे बस वही मेरा स्वामी वही मेरा आर्य है

कर रहे क्यों सभी मिल भविष्य का किला ध्वस्त है

इसीलिए शायद इसीलिए अभी तक मेरे भारत में विकास का सूर्य अस्त है



कुछ समझ गए हम कुछ समझना बाकी है

अभी और देखो आगे अभी तो यह केवल झांकी है

कुछ जनता खुश तो कुछ जनता त्रस्त है

शायद इसीलिए अभी तक मेरे भारत में विकास का सूर्य अस्त है



छोड़ दो आलस मन को स्थिर करो तो सही

एक नहीं कई महापुरषों ने बात यही हैं कही

याद करो इतिहास को कैसे दी भारत ने दुश्मनों को शिकस्त है

जाग जाओ वार्ना उठ रहा यह प्रश्न ज्वंलत है

क्यों अभी तक भारत में विकास का सूर्य अस्त है



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