मंगल बसेरा

13 जून 2020   |  मंजू गीत   (294 बार पढ़ा जा चुका है)

अपनी अपनी सब कहें, दूजे की सुनें समझें ना। दूसरे को भी अपने से बढ़कर समझें, तो दुःख काहे का होए। अपने को दूसरों की नजरों में, अच्छा बनाने के सो जतन, पर खुद से वास्ता ना होए, औरों के लिए जीने से अच्छा, अपनों संग खुद का भी बेहतर जीवन होए। ना जोगी बन, ना संन्यासी बन.. गृहस्थ जीवन से बढ़कर, ना कर्म तपस्या होए। अपना मान, जिन्हें चाहें, समझाएं.. वहीं नासमझी कर, मन का मंदिर ढाए, तो मन का सुख और दुःख किससे सांझा होए। होश संभलने से लेकर जों जिया हो तन्हा, अकेलेपन से अपनेपन का सुकुन पा, उसके जीवन में सुख संसार का बसेरा होए। जिया हो जों सदा दूसरों के लिए, मंगल जीवन जीने की दुआ का हकदार भी वह होए। अपनी अपनी सब कहें, दूसरे की सुनें समझें ना, शक और रंज लेकर औरों को भी घायल करें, खुद भी अंधा होए, सोचों समझों वक्त की नजाकत को, गलत समझा है जिसे, वह गलत ही होए। जरूरी नहीं कि आपका सोचा समझा ही पूरा होए, अपनों को चाह कहने से ही,प्रेम बसेरा होए.. दूसरे को भी अपने से बढ़कर समझें तो, दुःख काहे को होय..

अगला लेख: सबक



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
19 जून 2020
को
कोई अपना होता तो कुछ कहते। सर्द हवाओं की चुभन होती या, तपती जून की रातों की बैचेनी उससे सांझा करते। बैचेन कटी रात, करवटों के बदलने का सबब कहते। कोई अपना होता तो कुछ कहते। कच्ची सी नींद, अचानक से आंख का खुल जाना, आंधी रात में झुंझला कर उठ जाना, और फिर मोबाइल में, या यादों की गली में मुड़ जाना। ना जा
19 जून 2020
26 जून 2020
दू
दुनिया में आए अकेले हैं। दुनिया से जाना अकेले हैं। दर्द भी सहना पड़ता अकेले हैं। लोग मतलब निकलते ही छोड़ देते अकेला है। तो फिर काहे की दुनियादारी, लोगों से दूर रहने में ही ठीक है। दर्द जब हद से गुजरता है तो गा लेते हैं। जिंदगी इम्तिहान लेती है। कभी इस पग में कभी उस पग में घुंघरू की तरह बजते ही रहें
26 जून 2020
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x