अपना घर

20 जून 2020   |  मंजू गीत   (330 बार पढ़ा जा चुका है)

वो आई थी मेरे घर, अपना घर बनाने को.. तांक झांक कर देख गई, उठ बैठ कर देख गई, अपना घर बसाने को, वो आई थी मेरे घर, अपना घर बनाने को.. तिनका तिनका बीनने को, दिन पूरा जोड़ दिया, कुछ कम पड़ा तो कुछ और जोड़ लिया। वो आई थी मेरे घर, अपना घर बनाने को.. मेरे घर की आंखें, उसको देखें, उसकी आंखें उनको देखें, थोड़ी सी चाह अपनी लिए, चहक बिखेरती वो मेरे घर आई थी, अपनी बोली, प्रेम अहसास, चाह पाने वो आई थी... घर की वो छोटी, उसे लेकर चिल्लाई थी। फैला दिया है तिनका तिनका, मेरे घर में ये गंद फैलायेगी, उठाके छोटी, सब तिनके फेंक देती, जो वो बड़ी मेहनत से जोड़ जगोड़ के लाई थी। दो तीन दिन हुए थे अभी, छोटी कों वो एक आंख भी ना भाई थी। उसके घर के आगे,छोटी ने ईंट की आधी कुतर सरकाई थी। तिनका लेकर जब वो आई थी, शांत बैठ कुछ पल, वो भी सोच विचार लगाईं थी, बना कर अपना छोटा सा आशियाना, वो भी पछताई थी। मेरे घर में, छोड़ अपना आशियाना चली गई वो, शायद वो भी तिरस्कार ना सह पाई थी। वो नन्ही गोरैयां, सब छोड़ अपना, उड़ गई वो सोन चिरैया... जाने के बाद पलट दुबारा वो आई ना... वो आई थी मेरे घर, अपना घर बनाने को...

अगला लेख: सबक



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
19 जून 2020
को
कोई अपना होता तो कुछ कहते। सर्द हवाओं की चुभन होती या, तपती जून की रातों की बैचेनी उससे सांझा करते। बैचेन कटी रात, करवटों के बदलने का सबब कहते। कोई अपना होता तो कुछ कहते। कच्ची सी नींद, अचानक से आंख का खुल जाना, आंधी रात में झुंझला कर उठ जाना, और फिर मोबाइल में, या यादों की गली में मुड़ जाना। ना जा
19 जून 2020
28 जून 2020
कल्पना को आज भी वह शब्द याद है। "साथी" सच इस शब्द के इर्द गिर्द उसने अपनी जिंदगी को बुनना शुरू कर दिया था। जिंदगी है क्या कभी जाना ही नहीं था। रात के अंधेरे में धीरज का मेसेज का स्करीन पर टू टू की आवाज के साथ आना। आज भी कल्पना की धडकनों में रमा है। शाम 8 बजे के बाद जब भी मेसेज की ट्यूनिंग आती। उसे व
28 जून 2020
28 जून 2020
धी
कल्पना सपना से अबोध नहीं थी। कल्पना ने सपना को अपनी बातों की खनक से हमेशा धीर के सामने रखा। हालांकि वह दोनों के साथ नहीं होती थी लेकिन वह दोनों से कभी दूर भी नहीं थी। सपना धीरज का अर्धांग है और अर्धांग सांस, आस, विश्वास, से जुड़ा होता है। यह सच भी कभी झूठ नहीं हो सकता। लेकिन औरत भाषा और भाव में पु
28 जून 2020
13 जून 2020
मं
अपनी अपनी सब कहें, दूजे की सुनें समझें ना। दूसरे को भी अपने से बढ़कर समझें, तो दुःख काहे का होए। अपने को दूसरों की नजरों में, अच्छा बनाने के सो जतन, पर खुद से वास्ता ना होए, औरों के लिए जीने से अच्छा, अपनों संग खुद का भी बेहतर जीवन होए। ना जोगी बन, ना संन्यासी बन.. गृहस्थ जीवन से बढ़कर, ना कर्म तप
13 जून 2020
07 जून 2020
धर्म धर्म का उफान उठा है, मानव धर्म कोई ना निभाएं। चील, कव्वे, गिध, गधा, कुत्तों का नाम लेकर एक इंसान दूजे को कोसे, पर खुद के अंदर झांकने का इरादा ना पाए। बेटी पिता को बिठा साइकिल पर मीलों सफर कर, अपने गांव घर ले आए। पढ़ें लिखे लोगों के बीच भूख से व्याकुल हथिनी, खानें के नाम पर धोखा खाएं। कदमों के छ
07 जून 2020
28 जून 2020
अब तक हिंदी न्यूज़ /प्रयागराज/घूरपुर (प्रयागराज) शोक संतप्त परिजनों को ढाढ़स बंधाने पहुंचे अपना दल एस के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य राजेश पटेल (बुलबुल)। दो दो जवान लड़कों की मौत की खबर सुनकर अपना दल एस के नेता राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य राजेश पटेल तेवरिया गांव में इंद्रराज सिंह के घर पर पहुं
28 जून 2020
27 जून 2020
माना हम चिट्ठियों के दौर में नहीं मिलें, डाकिए की राह तकी नहीं हमने। हम मिले मुट्ठियों के दौर में। जिसमें रूमाल कम, फोन ज्यादा रहता था। माना हम किताब लेने देने के बहाने नहीं मिलें, जिसे पढ़ते, पलटते सीने पर रख, बहुत से ख्वाब लिए उसके साथ सो जाया करते। हम मिले मेसेज, मेसेंजर, वाट्स अप, एफ बी, इंस्टा
27 जून 2020
13 जून 2020
मं
अपनी अपनी सब कहें, दूजे की सुनें समझें ना। दूसरे को भी अपने से बढ़कर समझें, तो दुःख काहे का होए। अपने को दूसरों की नजरों में, अच्छा बनाने के सो जतन, पर खुद से वास्ता ना होए, औरों के लिए जीने से अच्छा, अपनों संग खुद का भी बेहतर जीवन होए। ना जोगी बन, ना संन्यासी बन.. गृहस्थ जीवन से बढ़कर, ना कर्म तप
13 जून 2020
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x