आत्मा हमारी अपनी चेतना

23 जून 2020   |  कात्यायनी डॉ पूर्णिमा शर्मा   (442 बार पढ़ा जा चुका है)

आत्मा हमारी अपनी चेतना

स्वयं प्रकाश स्वरूप एवं स्वयं प्रकाशित तथा नित्य शुद्ध बुद्ध चैतन्य स्वरूप हमारी अपनी आत्मा को किसी अन्य स्रोत से चेतना अथवा प्रकाश पाने की आवश्यकता ही नहीं - और यही है परमात्मतत्व - परमात्मा - इसे पाने के लिए कहीं और जाने की आवश्यकता ही नहीं - आवश्यकता है तो अपने भीतर झाँकने की - पैठने की अपने भीतर - और वही है सबसे कठिन कार्य...

उपनिषदों में तो आत्मा को कहा ही गया है स्वयं प्रकाश | जो स्वयं प्रकाश है उसे प्रकाशित करने की आवश्यकता ही नहीं है | आवश्यकता है इस प्रकाश को समझ कर उससे दिशा प्राप्त कर अपनी आत्मा की चैतन्यता को समझ आगे बढ़ जाने की |

यदि स्वयं से ही अपरिचित रह गए तो आगे बढ़ना व्यर्थ है | आत्मा की सुषुप्ति, स्वप्न तथा जाग्रत हर अवस्था में चैतन्य विद्यमान रहता है, अतः चैतन्य आत्मा का शुद्ध स्वभाव है | चैतन्य होने के कारण आत्मा स्वयं प्रकाश है तथा जगत को भी प्रकाशित करता है | व्यक्ति का सबसे बड़ा गुरु भी यही होता है और यही ज्ञातव्य भी होता है | यह शाश्वत है, अनादि है, अनन्त है – यही कारण है कि न यह कभी जन्मता है, न मृत्यु को प्राप्त होता है, न यह किसी भौतिक (जो पञ्चभूतों से निर्मित हो) पदार्थ की भाँति गल सकता है, न जल सकता है | इनमें से कोई भी गुण धर्म आत्मा का नहीं है |

न जायते म्रियते वा कदाचित्, नायं भूत्वा भविता वा न भूयः |

अजो नित्यः शाश्वतोSयं पुराणो, न हन्यते हन्यमाने शरीरे ||

गीता - 2/20

ऐसी अविनाशी तथा निरन्तर विद्यमान इसी आत्मा के रहस्य को – परमात्म तत्त्व को - यदि समझ गए तो फिर परमात्मा को अन्यत्र ढूँढने की आवश्यकता ही नहीं रह जाती – वह तो अपने भीतर ही निहित होता है...

आध्यात्मिक जिज्ञासु भौतिक सुखों से ऊपर उठकर इसी परमात्मा को समझने का प्रयास करते हैं, जो निश्चित रूप से अत्यन्त कठिन मार्ग है | किन्तु यदि हमने हर व्यक्ति की आत्मा को अपने सामान समझ लिया तो जानिये हम परमात्मा को समझने की दिशा में अग्रसर हैं...

ऐसा ही कुछ कहने का प्रयास है इन पंक्तियों में... सुनने के लिए क्लिक करें...

https://youtu.be/kRNmlNgmtcM

अगला लेख: नियम प्रकृति का



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
24 जून 2020
प्रकृति के समस्त कार्य नियमों में बंधेहोते हैं – एक लय में बंधे होते हैं | लेकिन इसके साथ ही प्रकृति का हर अंग अपनेशर्तों पर प्रवाहमान रहता है | इनका प्रवाह तभी बाधित होता है जब ये अपने चरम सेजा मिलते हैं | कुछ ऐसा ही भाव आज की रचना में है... “नियम प्रकृति का”...https://youtu.be/KshyF0oP6ic
24 जून 2020
30 जून 2020
बरखा की सुहानी रुत में मेघों की बात न हो, उनकी प्रिय सखी दमयन्ती की बात न हो, प्रकृति के कण को में व्याप्त मादकता की बात न हो -ऐसा तो सम्भव ही नहीं... निश्चित रूप से कोई योगी या कोई विरह वियोगी ही होगा जोइस सबकी मादकता से अछूता रह जाएगा... तो प्रस्तुत है हमारी आज की रचना "मेघइठलाए रहे हैं"... सुनने
30 जून 2020
01 जुलाई 2020
💐💐राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस💐💐भारत का डॉक्टर हार रहा-हुआ हताशकवि अश्रु बहा थकित-हो रहा निराश''कोभिड'' फटेहाल देख डॉक्टर कोआगोश में समेट कहीं छुप जाता हैघर में बने 'मास्क' पहन क्या (?) कोईकोभिड संक्रमण से क्या बच पाता हैपैदल चल कर आखीर कैसे डॉक्टर५लाख पार खाने वाले को-मार भगा पाएगापहुँच रहा आँकड़
01 जुलाई 2020
29 जून 2020
देवशयनी एकादशी, आषाढ़ी एकादशी, विष्णु एकादशी,पद्मनाभा एकादशी हिन्दू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्त्व है| प्रत्येक वर्ष चौबीस एकादशी होती है, और अधिमास हो जाने पर ये छब्बीस हो जाती हैं | इनमेंसे आषाढ़ शुक्ल एकादशी को देवशयनी एकादशी के नाम से जाना जाता है | साथ ही आषाढ़ मास में होने के कारण इसे आषाढ़
29 जून 2020
30 जून 2020
आज का प्रेरक प्रसंग ग्लास को नीचे रख दीजिये-------------------------------------------------एक प्रोफ़ेसर ने अपने हाथ में पानी से भरा एक Glass पकड़ते हुए Class शुरू की . उन्होंने उसे ऊपर उठा कर सभी Students को दिखाया और पूछा , ” आपके हिसाब से Glass का वज़न कितना होगा?” ’50gm….100gm…125
30 जून 2020
20 जून 2020
मानसिक असन्तुष्टि और अशान्तिहमारा मन वास्तव में स्वयं को किसी न किसी रूप में अपूर्ण - अधूरा -असन्तुष्ट मानने के लिए स्वतन्त्र है । लेकिन क्या डिप्रेस होकर - स्वयं से अथवासमाज या व्यवस्था की ओर से निराश होकर आत्महत्या कर लेना ही इस समस्या का समाधानहै ? संसारतो पहले से ही नाशवान है, स्वयं उस दिशा में
20 जून 2020
15 जून 2020
आत्महत्या ही क्यों, समाधानक्यों नहीं कल एक बहुत ही टैलेंटेड कलाकार सुशान्त सिंह राजपूत के असमय निधन के विषयमें ज्ञात हुआ | आज भी एक समाचार ऐसा ही कुछ मिला कि द्वारका में किन्हीं IRS Officer नेअपनी कार में एसिड जैसा कुछ पीकर आत्महत्या कर ली इस भय से कि उनके कारण कहीं उनकेपरिवार को कोरोना का इन्फेक्शन
15 जून 2020
24 जून 2020
प्रकृति के समस्त कार्य नियमों में बंधेहोते हैं – एक लय में बंधे होते हैं | लेकिन इसके साथ ही प्रकृति का हर अंग अपनेशर्तों पर प्रवाहमान रहता है | इनका प्रवाह तभी बाधित होता है जब ये अपने चरम सेजा मिलते हैं | कुछ ऐसा ही भाव आज की रचना में है... “नियम प्रकृति का”...https://youtu.be/KshyF0oP6ic
24 जून 2020
01 जुलाई 2020
जीवन मेंअनगिनती पल ऐसे आते हैं जब माता पिता की याद अनायास ही मुस्कुराने को विवश कर देतीहै | ऐसा ही कुछ कभी कभी हमारे साथ भी होता है | माँ क्या होती है – इसके लिए तोवास्तव में शब्द ही नहीं मिल पाते | माँ की जब याद आती है तो बस इतना ही मन करताहै: माँ तेरी गोदीमें सर रख सो जाऊँ मैं पल भर को, तो लोरी तू
01 जुलाई 2020
14 जून 2020
हम क्या हैंप्रायः हम अपने मित्रों से ऐसे प्रश्न कर बैठते हैं कि हमें तो अभी तक यहीसमझ नहीं आ रहा है कि हम हैं क्या अथवा हमारे जीवन का उद्देश्य क्या है ? हम इसमाया मोह के चक्र से मुक्त होना चाहते हैं, किन्तु निरन्तर जाप करतेरहने के बाद भी हम इस चक्रव्यूह को भेद नहीं पा रहे हैं | समझ नहीं आता क्या करे
14 जून 2020
23 जून 2020
क्या ये नया अप्प बच्चो के लिए सुरक्षित है?
23 जून 2020
05 जुलाई 2020
अज्ञान्तिमिरान्धस्य ज्ञानांजनशलाकयाचक्षुरुन्मीलितं येन तस्मै श्री गुरवे नमःआजगुरु पूर्णिमा का पावन पर्व है | कल प्रातः 11:35 के लगभग पूर्णिमा तिथि का आगमन हुआथा | जो आज सवा दस बजे तक रहेगी | उदया तिथि होने के कारण गुरु पूजा का पर्व आज हीमनाया जाएगा | पूर्णिमा काव्रत क
05 जुलाई 2020
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x