नियम प्रकृति का

24 जून 2020   |  कात्यायनी डॉ पूर्णिमा शर्मा   (418 बार पढ़ा जा चुका है)

नियम प्रकृति का

प्रकृति के समस्त कार्य नियमों में बंधे होते हैं – एक लय में बंधे होते हैं | लेकिन इसके साथ ही प्रकृति का हर अंग अपने शर्तों पर प्रवाहमान रहता है | इनका प्रवाह तभी बाधित होता है जब ये अपने चरम से जा मिलते हैं | कुछ ऐसा ही भाव आज की रचना में है... “नियम प्रकृति का”...

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