जेठ की चिलचिलाती धूप

27 जून 2020   |  कात्यायनी डॉ पूर्णिमा शर्मा   (332 बार पढ़ा जा चुका है)

जेठ की चिलचिलाती धूप

अभी बाहर बड़े अच्छे से आषाढ़ की बारिश हो रही है – आषाढ़ – जो अभी और सप्ताह के बाद समाप्त हो जाएगा और श्रावण माह का आरम्भ हो जाएगा झमाझम बारिश के साथ | पेड़ पौधों से झरती बरखा की बूँदें सुरीला राग छेड़ती तन मन को गुदगुदा रही हैं | अभी पिछले दिनों ज्येष्ठ माह में जब चिलचिलाती धूप ने सबको बेहाल किया हुआ था तब हर कोई आषाढ़ की एक बूँद की प्रतीक्षा कर रहा था | कितने मजेदार बात है न कि जब गर्मी पड़ती है तो बारिश की बाट जोहते हैं, बारिश कई दिनों तक हो जाए तो उसे भी परेशान हो जाते हैं और सर्दी की राह देखने लगते हैं | कहने का मतलब ये कि किसी एक मौसम से मन सन्तुष्ट नहीं होता | लेकिन जो व्यक्ति हर मौसम का आनन्द उठाना जानता है उसके लिए सारे मौसम एक सामान आनन्ददायक होते हैं | यही स्थिति जीवन की भी है | जीवन में भी सुख दुःख धूप छाँव की तरह साथ साथ चलते रहते हैं | जो व्यक्ति इस सबमें समभाव रहता हुआ जीवन व्यतीत करता है वास्तव में उसका जीवन ही जीवन है | कुछ ऐसा ही इन रचनाओं में कहने का प्रयास किया है | प्रस्तुत है हमारी आज की रचना – जेठ की चिलचिलाती धूप...

https://youtu.be/mVH2nG9WeJU

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