माँ का आँचल

01 जुलाई 2020   |  कात्यायनी डॉ पूर्णिमा शर्मा   (318 बार पढ़ा जा चुका है)

माँ का आँचल

जीवन में अनगिनती पल ऐसे आते हैं जब माता पिता की याद अनायास ही मुस्कुराने को विवश कर देती है | ऐसा ही कुछ कभी कभी हमारे साथ भी होता है | माँ क्या होती है – इसके लिए तो वास्तव में शब्द ही नहीं मिल पाते | माँ की जब याद आती है तो बस इतना ही मन करता है:

माँ तेरी गोदी में सर रख सो जाऊँ मैं पल भर को, तो

लोरी तू गा देना, दिल को कुछ तो राहत मिल जाएगी ।

तेरे आँचल की छाया से बढ़कर नहीं जहाँ की खुशियाँ,

सर पर तेरा हाथ रहे तो मंज़िल मुझको मिल जाएगी ।|

सुनने के लिए क्लिक करें:

https://youtu.be/aPDb4fexSn4

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