इन्द्रधनुष ऐसा लगता है

03 जुलाई 2020   |  कात्यायनी डॉ पूर्णिमा शर्मा   (293 बार पढ़ा जा चुका है)

इन्द्रधनुष ऐसा लगता है

रात दिन चौबीस घंटे बरखा रानी अपनी सखी दमयन्ती देवी की स्वर्णिम पायल झंकारती सखा मेघराज के मृदंग की थाप पर रिमझिम का गान सुनाती मस्त पवन के साथ मादक नृत्य दिखाती हो – लेकिन इसी बीच शाम को उनकी सखी धवल धूप इन्द्रधनुष का बाण चढ़ाए कुछ पलों के लिए उपस्थित हो जाएँ – और अपनी सखी बरखा से मिलकर वापस लौट जाएँ बरखा रानी को नृत्य रत छोड़कर - कितना नयनाभिराम दृश्य होता है... ऐसी मस्ती के आलम में कुछ होश नहीं रहता क्या बोला गया और क्या उसका अर्थ निकला... अर्थ यदि कुछ होता भी है तो बस एक... मस्ती में भर उन्मुक्त भाव से प्रेम की वर्षा में भीजते रहो... कुछ इन्हीं उलझे सुलझे से भावों को लिए आज की ये हमारी रचना है... एक बार सुनियेगा ज़रूर...

https://youtu.be/AhWFv3UGm-Y

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