पावस

10 जुलाई 2020   |  कात्यायनी डॉ पूर्णिमा शर्मा   (297 बार पढ़ा जा चुका है)

पावस

पावस की सुषमा है छाई ||

सजे कसुम्भी साड़ी सर पर, इन्द्रधनुष पर शर साधे

थिरक रही है घटा साँवरी बिजली की पायल बाँधे |

घन का मन्द्र मृदंग गरजता, रिमझिम रिमझिम की शहनाई ||

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https://youtu.be/zRVx57amQzs

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