गोप और राधा भाव

20 जुलाई 2020   |  डॉ कवि कुमार निर्मल   (334 बार पढ़ा जा चुका है)

गोप और राधा भाव

बाल गीत कान्हा का आज मैं गाऊँ।
प्रियतम् गोप उनका बन मैं जाऊँ।।
🙏🙏🌸🌸🌹🌸🌸🙏🙏
🙏 🙏 "नंद गोपाला" 🙏 🙏
हर कवि कृष्ण भक्त होता है
'नंद' वही जो आनंद देता है
नंदन तो आनंद पाता - देता है
'गोप् सदा हीं आनंद देता है
गोपालक कृष्ण कहलाते है
सूर के कृष्ण ग्वाले कहलाते हैं
रागानूगा भक्ति कही गई है
प्रथम चरण रागात्मिका है
द्वितीय चरण रागानुमा' है
रागानुमा का सही अर्थ यही है
भक्त के प्यार से कृष्ण आनंद पाते है
प्रियतम् ब्रजगोपाल को प्यार कर
कृष्ण भक्त अति आह्लादित होता है
रागानुगा यही उच्चस्तरीय भक्ति है
रागात्मिका भक्ति में एषणा नहीं है
कृष्ण हो प्रसन्न, गोप का लक्ष्य यही है
ऐसे कर्म, सुकृत सारे हों हमारे
कृष्ण प्रसन्न रहें सदा हीं हमारे
इसमें चाहे कोई बाधा ओर विध्न आएं
पथ कंटकविद्ध हो भले- दु:खि बनाएं
समस्त क्लेश सह जाए पर अश्रु न आएं
नन्दनविज्ञान यही मेरा जीवन बन जाए
विश्व-ब्रह्माण्ड के खण्ड-खण्ड में वे गोचर हैं
अणु-चेतन हर खण्ड में वे अभिप्रकाशित है
हर खण्ड- पल- अणुपल- विपल भाव में हो
जिस रूप में भी तुम हीं प्रतिभात हुए हो
इस खण्ड से अखण्ड आनंद भक्त पाता है
अनुभूतियों को गुँथ सुंदर माला बनाता है
तुम्हारा हर अभिप्रकाश कांत मणि सम है
एक सुत्र में पिरो तुझे पा जाऊँ चाह यही है
मानो मित्र यही सच्ची कृष्ण भक्ति है
कृष्ण से प्यार हीं महत् अनुरक्ति है
रास के हम सब गोप-गोपियाँ,
संग भक्तों के उनकी शक्ति है
कृष्ण प्रियतम् भाव- भक्ति है


🙏डाॅ. कवि कुमार निर्मल🙏

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