आधुनिकरण

21 जुलाई 2020   |  रबिन्द्रनाथ बनर्जी -रंजन-   (300 बार पढ़ा जा चुका है)

आधुनिकरण (Modernisation)

स्नान घर के दरवाजे,
अब,
स्विमिंगपूल पर जाकर ,
खुलते हैं !
मारे शर्म के घुघट ,
उतर गई है ------
स्विमिंग ड्रेस के सामने !
अब उन्हें इतना पर्याप्त ,
नहीं लगा !!!
स्नान के लिए अब पहनना ..
कुछ भी जरूरी नहीं ,
मीटिंग में .
मांग रखा गया !!
शायद वे ठीक हैं !
कपडे के नीचे तो ,
नग्न सभी है !
नहीं है तो भी ,
वैसा देखने के लिए ,
पुरुष के पास कल्पना की आखें ,
काफी है !!!
(MY DEAR MALES, WHY YOU ARE APPLYING ALL YOUR SKILLS TO DISROBE THE FAIRER SEX. THE ALMIGHTY HAS PROVIDED YOU TWO BIG EYES. TAKE THE HELP OF YOUR IMAGINATION. AND GET RID OF RUINING YOUR SKILLS.)
-----------
By Rabindranath Banerjee (Ranjan)

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