रहस्य

21 जुलाई 2020   |  मंजू गीत   (310 बार पढ़ा जा चुका है)

ए जिंदगी तू है तो रहस्य... तुझे तरस कहूं ,तुझे ओस कहूं तुझे पारस कहूं, तुझे नूर कहूं तुझे धारा कहूं, तुझे किनारा कहूं तुझे धानी चुनर कहूं , तुझे काली ओढ़नी कहूं तुझे आस कहूं, तुझे विश्वास कहूं तुझे रंग कहूं, तुझे जंग कहूं तुझे पतंग कहूं, तुझे बहता नीर कहूं तुझे उपहार कहूं, तुझे अभिशाप कहूं तुझे कर्म कहूं, तुझे विधाता के लेख कहूं तुझे धूप कहूं, तुझे छांव कहूं तुझे नयन ज्योति कहूं, तुझे पांव में लगी ठोकर कहूं तुझे परछाई कहूं तुझे हरजाई कहूं तुझे रिश्ते जिस्मानी कहूं, तुझे आत्मा परमात्मा की निशानी कहूं तुझे तकदीर कहूं तुझे तकरीर कहूं तुझे भीख कहूं तुझे सीख कहूं तुझे किसी की अमानत कहूं तुझे खुद से बगावत कहूं ए जिंदगी तू है तो रहस्य...

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