यादें

24 जुलाई 2020   |  Arun choudhary(sir)   (330 बार पढ़ा जा चुका है)

कुछ मीठी,कुछ खट्टी,कुछ कड़वी,कुछ रंगीन,

कुछ बचपन की,कुछ जवानी की,कुछ संगीन।

ये ही तो हैं वो यादें,जो भूले ना भुलायी जा सकी;

कुछ यादें पूरी याद रही,याद रह गयी अधूरी बाकी।

कुछ यादें तड़पाती है,कुछ प्रफुल्लित कर जाती है;

यादें तो यादें हैं ,जो कभी हंसा तो कभी रुला जाती है।

कभी मुस्कान ,कभी शिकन,कभी शांति ,चेहरे पे लाती है;

ये यादें ही तो है,जो बैठे बैठे चेहरे के रंग बदल जाती हैं।

कोई अपनों के बिना, इन यादों के सहारे जी जाता है;

तो कोई यादों के बिना,जीते हुए भी नहीं जी पाता है।

यादों के इस विशाल समुंदर में, गोता कोई लगा जाता है;

वह मोती और सिप जैसे,रिश्तों की बुनियाद रख जाता है।

अकेलेपन का सहारा होती है,उसका विश्वास होती है यादें;

जीने का मकसद लिए,किसी को पुनर्जीवित कर देती है ये यादें।


अगला लेख: शादी के बाद



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
16 जुलाई 2020
इंदौर के पास एक कस्बा राऊ नगर, रंगवासा रोड पे स्थित उमिया पैलेस बिल्डिंग के फर्स्ट फ्लोर पर रोजाना की तरह महिलाओं,बच्चों और पुरुषों की हलचल।अचानक से राऊ नगर के जननायक भाई राजेश मंडले का आगमन।दोपहर के करीब साढ़े बारह बजे थे।संजय सर,अरुण
16 जुलाई 2020
17 जुलाई 2020
रोज इंतेज़ार करते है, तुम्हारे इन अलफाजों का,शोर मच जाता है,इस खामोशी के आलम में,जब आगाज़ होता है, इन अलफाजों का।
17 जुलाई 2020
10 जुलाई 2020
मजा तब शुरू होता जब सबसे छोटे बापू मामा गर्मी की छुट्टियों में गांव आते साथ में देवगांव के प्रसिद्ध पेडे जरूर लाते ।उनके आते ही हवेली कि रौनक बढ़ जाती ,क्योंकि मामा भले ही
10 जुलाई 2020
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x